Published on 25/03/2026 08:02 PM
स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म Dream11 की पेरेंट कंपनी Dream Sports अब स्टॉक ब्रोकिंग मार्केट में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी Dream Street नाम से नया ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च करने वाली है। इसका मकसद देश में तेजी से बढ़ रहे रिटेल निवेशकों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ना है।
Dream Sports के CEO हर्ष जैन ने Moneycontrol को दिए इंटरव्यू में बताया कि कंपनी को इस कारोबार के लिए सभी जरूरी लाइसेंस मिल चुके हैं। फिलहाल प्रोडक्ट की टेस्टिंग कंपनी के अंदर चल रही है और जल्द ही इसे आम निवेशकों के लिए लॉन्च किया जा सकता है। Dream Sports के पास 25 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। इतना बड़ा यूजर बेस कंपनी को अपने नए फाइनेंशियल सर्विस प्रोडक्ट्स को क्रॉस-सेल करने में मदद कर सकता है।
स्टॉक ब्रोकिंग में क्यों उतर रही Dream Sports
Dream Street को खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों के निवेशकों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इसमें AI आधारित पर्सनलाइज्ड इनवेस्टमेंट टूल्स दिए जाएंगे, जो निवेशकों को बेहतर फैसले लेने में मदद करेंगे।
हर्ष जैन का कहना है कि आज बाजार में लगभग 90 प्रतिशत लोग निवेश में पैसा खो देते हैं, क्योंकि उन्हें सही और व्यक्तिगत सलाह नहीं मिलती। ज्यादातर प्लेटफॉर्म उन 10 प्रतिशत लोगों पर ध्यान देते हैं जो मुनाफा कमाते हैं और प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहते हैं।
उनके मुताबिक AI की मदद से कंपनी ऐसे निवेशकों की भी मदद करना चाहती है जो निवेश को लेकर हिचकते हैं। साथ ही जिन निवेशकों को नुकसान होता है, उन्हें ऐसा अनुभव देने की कोशिश होगी जैसे उनके पास Goldman Sachs, Morgan Stanley या JP Morgan जैसे बड़े संस्थानों के एनालिस्ट हर समय उनकी मदद के लिए मौजूद हों।
Dream Street को लीड कौन करेगा
Dream Sports के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर राहुल मीरचंदानी इस नए ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म को लीड करेंगे और इसके CEO होंगे। उनके साथ Dream11 के प्रोडक्ट लीडर्स करण बंसल और निखिल लालवानी को-फाउंडर के रूप में काम करेंगे।
इसमें करण बंसल चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) और निखिल लालवानी चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर (CPO) की भूमिका निभाएंगे। यह कदम मुंबई स्थित इस स्टार्टअप के वित्तीय सेवाओं और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
कंपनी में हाल ही में हुआ बड़ा बदलाव
Moneycontrol की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में Dream Sports ने अपने कारोबार को आठ अलग-अलग यूनिट्स में बांट दिया था। इनमें हर यूनिट का अपना नेतृत्व है।
स्पोर्ट्स लीग में निवेश भी कंपनी के कारोबार का हिस्सा है। इसमें मुंबई की एक रग्बी टीम में हिस्सेदारी शामिल है। इसके अलावा कंपनी ने इंग्लैंड के एक प्रोफेशनल फुटबॉल क्लब में भी निवेश किया है। वहीं कंपनी की परोपकारी इकाई Dream Sports Foundation भी इसके कारोबार का हिस्सा है। इन सबको मिलाकर कंपनी के कुल कारोबार अब 11 हिस्सों में बंट चुके हैं।
यह बदलाव उस समय किया गया जब सरकार के ऑनलाइन गेमिंग कानून ने कंपनी के फैंटेसी स्पोर्ट्स बिजनेस मॉडल को प्रभावित किया। इसके कारण कंपनी की करीब 95 प्रतिशत आय और लगभग पूरा मुनाफा खत्म हो गया।
वित्तीय सेवाओं में पहले ही कर चुकी है शुरुआत
Dream Sports ने मई 2025 में Dream Money लॉन्च करके वित्तीय सेवाओं में कदम रखा था। शुरुआत में इस ऐप के जरिए यूजर्स को सोने और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की सुविधा दी गई थी। बाद में इसमें म्यूचुअल फंड और लोन जैसी सेवाएं भी जोड़ दी गईं।
इन सेवाओं के लिए कंपनी ने Augmont, ICICI Prudential Mutual Fund और Incred Finance जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की है।
ब्रोकिंग सेक्टर में नए खिलाड़ियों की एंट्री
Dream11 का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब कई फिनटेक और इंटरनेट कंपनियां भी भारत के स्टॉक ब्रोकिंग बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं।
MobiKwik को ब्रोकिंग शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है। वहीं Flipkart सपोर्टेड Super.money और कुणाल शाह की CRED भी निवेश से जुड़ी सेवाओं पर काम कर रही हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब बाजार में पहले से ही Groww, Zerodha और Angel One जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म मजबूत स्थिति में हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहा ब्रोकिंग बाजार
भारत के ब्रोकिंग सेक्टर में निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। फरवरी में देश के 10 बड़े ब्रोकर्स में से 7 के एक्टिव निवेशकों की संख्या बढ़ी। देश के सबसे बड़े ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Groww ने फरवरी में 2.65 लाख से ज्यादा नए ग्राहक जोड़े। वहीं Zerodha और Angel One ने क्रमशः 10,000 और 11,000 नए निवेशक जोड़े।
NSE के अनुसार, पिछले 12 महीनों में कम से कम एक बार ट्रेड करने वाले निवेशकों को एक्टिव माना जाता है।
डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर सख्त नियम
हाल के समय में डेरिवेटिव ट्रेडिंग को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। इसमें मार्जिन की सख्ती, वीकली एक्सपायरी में कमी, ज्यादा पूंजी की जरूरत और टैक्स बढ़ोतरी जैसे कदम शामिल हैं।
हाल ही में STT टैक्स बढ़ाने के फैसले से भी फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में सट्टा कारोबार कम होने की उम्मीद है।
Zerodha के नितिन कामत ने कहा-यह प्रॉफिट कमाने का नहीं बल्कि खुद को बचाने का समय है, जानिए वजहहिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।