Published on 13/03/2026 01:10 PM
Auto stocks : पश्चिम एशिया जंग का ऑटो सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है। मैक्वायरी,JP मॉर्गन और नोमुरा ने ऑटो सेक्टर पर रिपोर्ट पेश की है। ऑटो सेक्टर पर मैक्वायरी का कहना है कि मैक्रो अनिश्तिता से ऑटो में ग्रोथ से जुड़ा रिस्क है। गैस सप्लाई से मार्च में उत्पादन पर असर पड़ा है। सेक्टर में डिमांड और मार्जिन को अर्निंग रिस्क है। ऑटो सेक्टर में अनिश्तिता से मार्जिन पर असर होगा। इसके चलते कई ऑटो शेयर अंडरपरफॉर्म कर सकते हैं।
ऑटो सेक्टर पर JP मॉर्गन
JP मॉर्गन का कहना है कि पश्चिम एशिया जंग का ऑटो पर बुरा असर देखने को मिल सकता है। कमोडिटी कीमतें बढ़ने से ऑटो कंपनियों की लागत बढ़ेगी। गैस सप्लाई संकट से इनके उत्पादन पर असर संभव है। गैस शॉर्टेज से प्लांट शटडाउन का भी खतरा है। CNG की सप्लाई में आगे दिक्कतें आनी संभव हैं। फ्यूल और महंगे कमोडिटी से ऑटो कंपनियों के मार्जिन पर असर होगा। ग्लोबल शिपिंग में दिक्कतों से इनके एक्सपोर्ट पर भी असर देखने को मिल सकता है। गैस सप्लाई संकट से डिमांड में कमी की आशंका।
इस साल यह सेक्टर पहले से ही पूरे बाज़ार की तुलना में पीछे चल रहा है। ब्रोकरेज के अनुसार,2026 में अब तक निफ्टी ऑटो इंडेक्स में लगभग 12 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि बेंचमार्क इंडेक्स Nifty में लगभग 9.5 फीसदी की गिरावट देखी गई है। इसके बावजूद, JPMorgan ने कहा कि मार्च में ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री की मात्रा अब तक मज़बूत बनी हुई है, हालांकि कमज़ोर होते कंज्यूमर सेंटीमेंट के कारण हाल ही में GST दरों में कटौती के बाद देखी गई मांग में सुधार की प्रक्रिया को ख़तरा पहुंच सकता है।
JP मॉर्गन की टॉप पिक
JP मॉर्गन की ऑटो सेक्टर की टॉप पिक में मारुति (Maruti), महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और हीरो मोटो (Hero Moto) शामिल हैं। ब्रोकरेज का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी की बढ़ती कीमतें भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए दोहरे जोखिम पैदा कर रही हैं। इन शॉर्ट टर्म जोखिमों के बावजूद, ब्रोकरेज का कहना है कि Maruti Suzuki, Mahindra & Mahindra , Hero Moto और Hyundai Motor India उसकी टॉप पिक में शामिल है,क्योंकि इनमें ग्रोथ की संभावना ज़्यादा मज़बूत है और वैल्यूएशन का भी सपोर्ट कर रहे हैं।
ऑटो सेक्टर पर नोमुरा
जापानी ब्रोकरेज नोमुरा का कहना है कि ऑटो इंडस्ट्री में उत्पादन के लिए गैस सप्लाई भी अहम भूमिका होती है। इन कंपनियों के लिए वैकल्पिक एनर्जी पर तुरंत शिफ्ट होना मुमकिन नहीं है। पेंट,फर्नेस,कास्टिंग और हीट प्रक्रिया के लिए गैस जरूरी होती है। कैंटीन की गैस को उत्पादन में लगाने पर विचार संभव है। ऑटो कंपनियों के पास इन्वेट्री काफी सीमित है। कंपनियां छुट्टियों के दौरान प्लांट चलाकर प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकती हैं।
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गैस शॉर्टेज का किसपर असर
ब्रोकरेज का कहना है कि गैस शॉर्टेज से सभी कंपनियों को खतरा है। इनमें भी इसका मारुति,टीवीएस मोटर,बजाज ऑटो,भारत फोर्ज,बालकृष्ण इंडस्ट्रीज़,अपोलो टायर्स और ऊनो मिंडा पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।
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