Published on 04/03/2026 07:32 PM
Bear Market: भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक भले ही बहुत ज्यादा न गिरे हों, लेकिन बाजार का बड़ा हिस्सा पहले ही गहरे करेक्शन में पहुंच चुका है। Monarch AIF की एक रिपोर्ट के मुताबिक- सेंसेक्स और निफ्टी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 6 से 7 प्रतिशत ही नीचे हैं। लेकिन, लिस्टेड कंपनियों में से लगभग 80 प्रतिशत शेयर पहले ही बेयर मार्केट की स्थिति में आ चुके हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि हेडलाइन इंडेक्स और पूरे बाजार के प्रदर्शन के बीच बड़ा अंतर बन गया है।
ज्यादातर शेयरों में बड़ी गिरावट
रिपोर्ट में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मार्केट कैप वाली कंपनियों का एनालिसिस किया गया। इसमें पाया गया कि 64 प्रतिशत से ज्यादा शेयर अपने ऑल टाइम हाई से 30 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुके हैं। करीब 78 प्रतिशत शेयरों में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।
मतलब कि बाजार के अधिकांश शेयर पहले ही भारी करेक्शन से गुजर चुके हैं। वहीं, बेंचमार्क इंडेक्स यानी सेंसेक्स और निफ्टी अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। यह असामान्य स्थिति पिछले लगभग 18 महीनों से देखने को मिल रही है।
सेंसेक्स-निफ्टी अभी भी क्यों टिके हुए हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बाजार इस समय एक साथ समय आधारित और वैल्यू आधारित करेक्शन से गुजर रहा है। कुछ चुनिंदा लार्जकैप शेयरों ने ही बेंचमार्क इंडेक्स को ऊपर टिकाए रखा है।
दूसरी ओर सैकड़ों मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर चुपचाप काफी गिर चुके हैं। इस वजह से ऐसा लगता है कि इंडेक्स स्थिर हैं, लेकिन असल में व्यापक बाजार लंबे समय से दबाव में है।
मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी मुश्किल
हाल में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। इसके बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
इन घटनाओं के बीच सेंसेक्स हाल ही में 1,000 अंक से ज्यादा गिर गया, जबकि निफ्टी 24,900 के नीचे फिसल गया। ऐसे में निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि पहले से कमजोर बाजार अब भू राजनीतिक जोखिम और महंगे तेल के दबाव का सामना कर रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
Choice Equity Broking के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह के मुताबिक मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और ज्यादा अस्थिरता के माहौल में निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। उनका कहना है कि निवेशकों को अनुशासन बनाए रखना चाहिए और करेक्शन के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने सलाह दी कि निफ्टी में 25,000 के ऊपर मजबूत और टिकाऊ ब्रेकआउट मिलने के बाद ही नई लंबी पोजिशन लेना बेहतर होगा। इससे बाजार में सुधार के संकेत मिल सकते हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम महंगा तेल
Geojit Investments के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध बढ़ता है और तेल की कीमतें चढ़ती हैं तो बाजार में अनिश्चितता और बढ़ सकती है। यह कहना मुश्किल है कि यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा और इसका असर कितना बड़ा होगा।
भारत अपनी करीब 85 प्रतिशत तेल जरूरत आयात से पूरी करता है। इसलिए तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है, रुपया कमजोर हो सकता है और कंपनियों की कमाई पर दबाव आ सकता है। हालांकि अगर यह संघर्ष जल्दी खत्म हो जाता है तो इसका असर अस्थायी भी हो सकता है।
निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं
विजयकुमार का कहना है कि ऐसे समय में घबराकर बाजार से बाहर निकलना सही रणनीति नहीं होती। बाजार अक्सर अनिश्चित परिस्थितियों में भी वापसी कर लेते हैं। लंबी अवधि के निवेशक और ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता रखने वाले लोग करेक्शन के दौरान धीरे धीरे अच्छी कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं।
उनके मुताबिक बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और डिफेंस जैसे सेक्टर लंबी अवधि के लिए आकर्षक मौके दे सकते हैं।
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