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Bitcoin Price Crash: बिटकॉइन हाई लेवल से 50% क्रैश, बड़े निवेशक कर रहे बिकवाली; अब आगे क्या?

Published on 24/02/2026 11:10 PM

Bitcoin Price Crash: दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) में मंगलवार को तेज गिरावट देखी गई। यह 62,000 डॉलर के करीब आ गया। इसने पिछले साल अक्टूबर में करीब 126,000 डॉलर के ऑल टाइम हाई बनाया। वहां से यह 6 फरवरी को लगभग 60,000 डॉलर तक गिर गया। यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट। उस लेवल से रिकवरी जरूर आई, लेकिन पूरी तरह से वापसी नहीं हुई।

बिटकॉइन मार्केट के व्हेल यानी बड़े निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। वहीं अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बढ़ा दी है। दूसरी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ether पर भी दबाव रहा। यह पिछले 6 महीने में 61% क्रैश हो चुकी है। इसके फाउंडर विटालिक बुटेरिन को अपनी होल्डिंग का हिस्सा बेचते देखा गया, जिससे बाजार में बेचैनी बढ़ी।

व्हेल की बिकवाली से बढ़ा दबाव

CryptoQuant के ऑन चेन डेटा के मुताबिक बड़ी प्राइवेट वॉलेट्स से काफी मात्रा में Bitcoin एक्सचेंजों पर भेजा गया है। आम तौर पर जब बड़े होल्डर अपने कॉइन एक्सचेंज पर ट्रांसफर करते हैं, तो इसे संभावित बिक्री का संकेत माना जाता है। इससे बाजार में उपलब्ध सप्लाई बढ़ती है और कीमत पर दबाव आता है।

व्हेल वे निवेशक या संस्थाएं होती हैं जिनके पास बड़ी मात्रा में Bitcoin होता है। जैसे कि शुरुआती निवेशक, बड़े फंड या संस्थागत खिलाड़ी। इनके कदम से शॉर्ट टर्म कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल एक्सचेंजों पर बड़ी खरीदारी नजर नहीं आ रही है और हाल की गिरावट के बाद बाजार का भरोसा कमजोर बना हुआ है।

अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी से बढ़ी चिंता

अमेरिका में ट्रेड पॉलिसी को लेकर नई अनिश्चितता ने भी बाजार को झटका दिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया। उसने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार से ज्यादा कदम उठाया। इसके बाद ट्रंप ने 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लगाया और बाद में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया, जो कानून के तहत अधिकतम सीमा है।

इस फैसले का असर एशियाई बाजारों में भी दिखा, जहां इक्विटी और अन्य जोखिम वाले एसेट्स दबाव में रहे। निवेशकों को डर है कि ऊंचे टैरिफ से वैश्विक ग्रोथ धीमी हो सकती है और लिक्विडिटी कम हो सकती है। ऐसे माहौल में क्रिप्टोकरेंसी पर दबाव बढ़ना आम बात है।

Strategy ने फिर खरीदे Bitcoin

लिस्टेड कंपनियों में सबसे बड़ी Bitcoin होल्डिंग कंपनी Strategy है। इसने पिछले हफ्ते 592 Bitcoin खरीदे। इस पर 39.8 मिलियन डॉलर खर्च हुए और औसत कीमत 67,286 डॉलर प्रति कॉइन रही। यह खरीद कॉमन स्टॉक की बिक्री से जुटाई गई रकम से की गई।

इस खरीद के बाद Strategy के पास कुल 7,17,722 Bitcoin हो गए हैं, जिन्हें उसने कुल 54.56 बिलियन डॉलर में खरीदा है। प्रति कॉइन औसत लागत 76,020 डॉलर है।

छोटे निवेशक खरीद रहे बिटकॉइन

10 से 10,000 बिटकॉइन रखने वाले निवेशकों ने अपनी होल्डिंग करीब 0.8 प्रतिशत घटाई है। वहीं 0.1 BTC से कम रखने वाले छोटे निवेशकों ने 2.5 प्रतिशत बढ़ोतरी की है। वहीं 10,000 से 1 लाख BTC रखने वाले समूह ने करीब 10,000 बिटकॉइन घटाए हैं। यह आम तौर पर शुरुआती चरण का संकेत होता है, न कि बड़े ब्रेकआउट या बड़े बॉटम का।

बिटकॉइन के सपोर्ट और रेजिस्टेंस

ऑन चेन डेटा बताता है कि 72,600 से 73,200 डॉलर के बीच करीब 1.49 लाख बिटकॉइन खरीदे गए थे। यह अब एक भारी रेजिस्टेंस जोन बन गया है, क्योंकि यहां खरीदे गए निवेशक ब्रेक ईवन पर निकलना चाह सकते हैं। 72,200 डॉलर पहला बड़ा टेक्निकल रेजिस्टेंस है।

नीचे की तरफ 64,300 से 63,800 डॉलर के बीच लगभग 1.5 लाख बिटकॉइन का मजबूत सपोर्ट क्लस्टर है। 63,300 डॉलर एक अहम स्तर माना जा रहा है। अगर यह निर्णायक तौर पर टूटता है, तो 60,000 डॉलर की ओर रास्ता खुल सकता है। फिलहाल Bitcoin इन दोनों मजबूत दीवारों के बीच फंसा हुआ है।

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