Published on 21/08/2025 01:41 PM
बीएसई और एंजल वन के शेयरों में 21 अगस्त को बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के एक बयान को माना जा रहा है। 1 बजे बीएसई का शेयर 5.16 फीसदी गिरकर 2,392.80 रुपये चल रहा था। एंजल वन का शेयर 5.51 फीसदी लुढ़कर कर 2,567 रुपये पर था। पांडेय ने इक्विटी डेरिवेटिव्स्स की अवधि के बारे में 21 अगस्त को यह बयान दिया। उन्होंने उद्योग चैंबर फिक्की एनुअल कैपिटल मार्केट कॉन्फ्रेंस में कहा कि इक्विटी डेरिवेटिव की अवधि को बढ़ाना जरूरी है।
सेबी कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा
SEBI के चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने कहा कि इक्विटी डेरिवेटिव्स (Equity Derivatives) की अवधि बढ़ाने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रेगुलेटर इक्विटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि और मैच्योरिटी में इम्प्रूवमेंट के तरीकों के बारे में सोच रहा है। साथ ही कैश मार्केट में वॉल्यूम बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार हो रहा है। 12 अगस्त को बीएसई के एमडी और सीईओ एस राममूर्ति ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कहा था कि इंडिया में रेगुलेटरी पॉलिसी में लगातार बेहतरी की दिशा में बढ़ती रहती है। उन्होंने कहा था कि वीकली एक्सपायरी को हटाने से संबंधित रिपोर्ट्स पर रेगुलेटर के विचारों का उन्हें इंतजार है।
एफएंडओ सेगमेंट में क्वालिटी और बैलेंस जरूरी
सेबी चेयरमैन ने कहा कि एफएंडओ सेगमेंट में क्वालिटी और बैलेंस बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा, "कैपिटल फॉर्मेशन में इक्विटी डेरिवेटिव्स की बड़ी भूमिका है। लेकिन, हमें क्वालिटी और बैलेंस सुनिश्चित करना होगा। हम इस बारे में स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत करेंगे। डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट्स की अवधि और मैच्योरिटी बढ़ाने पर बात होगी। इससे हेजिंग और लॉन्ग टर्म इनवेस्टिंग के लिए इतना बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। "
बीएसई का फोकस रेवेन्यू सोर्सेज के डायवर्सिफिकेशन पर
उन्होंने यह भी कहा था कि डेटा के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इंडिया में ऑप्शंस का वॉल्यूम पीक पर पहुंच गया है। बीएसई का फोकस अभी मार्जिन बढ़ाने की जगह रेवेन्यू के स्रोतों के डायवर्सिफिकेशन पर है। एंजल वन के सीईओ दिनेश ठक्कर ने 22 जुलाई को कहा था कि ब्रोकरेज फर्म का 45 फीसदी रेवेन्यू एफएंडओ ब्रोकिंग सेगमेंट से आता है।
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एक्सचेंजों के रेवेन्यू में डेरिवेटिव्स की ज्यादा हिस्सेदारी
क्रॉससीज कैपिटल सर्विसेज के राजेश बहेती ने कहा कि डिस्काउंट ब्रोकर्स और एक्सचेंजों का 85 फीसदी रेवेन्यू डेरिवेटिव्स से आता है। उन्होंने एनएसई के रेवेन्यू में 35-40 फीसदी और बीएसई के रेवेन्यू में 50-60 फीसदी कमी का अनुमान जताया था। उनका मानना था कि फुल सर्विसेज ब्रोकरेज फर्मों के रेवेन्यू में 10-15 फीसदी गिरावट आ सकती है।Tags: #share marketsFirst Published: Aug 21, 2025 1:16 PMहिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।