Published on 01/02/2026 08:43 PM
Budget 2026: सरकार ने बजट 2026 को लोगों के हित में और रिफॉर्म पर फोकस करने वाला बजट बताया है। इसमें टैक्स सिस्टम को आसान बनाने, कंप्लायंस कम करने और लंबी अवधि की फाइनेंशियल स्थिरता पर जोर दिया गया है।
लेकिन स्मॉल इनवेस्टर्स के नजरिए से देखें तो बजट के कुछ फैसले ऐसे हैं, जो सीधे या परोक्ष रूप से उनकी कमाई, रिटर्न और निवेश की आजादी को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार का इरादा भले ही जोखिम भरे निवेश को हतोत्साहित करना और टैक्स के लूपहोल बंद करना हो, लेकिन इन फैसलों का असर छोटे निवेशकों की जेब पर साफ दिख सकता है।
1. F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ा, अब ट्रेडिंग पड़ेगी महंगी
Budget 2026 में एक्टिव रिटेल इनवेस्टर्स को सबसे बड़ा झटका डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर लगा है। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया है। वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शन एक्सरसाइज पर STT बढ़कर 0.15% हो गया है।
जो छोटे निवेशक फ्यूचर्स और ऑप्शंस में बार-बार ट्रेड करते हैं, उनके लिए अब हर ट्रेड पहले से ज्यादा महंगा होगा। इससे या तो मुनाफा घटेगा या नुकसान बढ़ेगा। सरकार इसे स्मॉल इनवेस्टर्स को जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी से बचाने का कदम बता रही है, लेकिन हकीकत यह है कि अब डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग की लागत काफी बढ़ चुकी है।
2. बायबैक टैक्स से शेयरहोल्डर रिटर्न पर असर
बजट में शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब बायबैक से मिलने वाली रकम को सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन टैक्स के तहत लाया गया है। इससे टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता तो आती है, लेकिन इसका असर कंपनियों की शेयरहोल्डर रिवॉर्ड स्ट्रैटेजी पर पड़ सकता है।
स्मॉल इनवेस्टर्स के लिए बायबैक अब तक टैक्स-एफिशिएंट तरीके से रिटर्न पाने का एक जरिया रहा है। लेकिन प्रमोटर्स पर बढ़े टैक्स बोझ की वजह से कंपनियां बायबैक की संख्या या साइज को कम कर सकती हैं। ऐसे में शेयरहोल्डर्स के लिए रिटर्न का यह रास्ता सीमित हो सकता है।
3. डिविडेंड और म्यूचुअल फंड इनकम पर ब्याज कटौती खत्म
एक अहम लेकिन कम चर्चा में रहने वाला बदलाव यह है कि अब डिविडेंड इनकम और म्यूचुअल फंड इनकम के खिलाफ ब्याज खर्च की कटौती नहीं मिलेगी। इसका सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ेगा, जो उधार लेकर या मार्जिन फाइनेंसिंग के जरिए निवेश करते थे।
पहले ब्याज खर्च टैक्सेबल इनकम को कुछ हद तक कम कर देता था, जिससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न बेहतर हो जाता था। अब यह सुविधा हटने से लीवरेज लेकर निवेश करने वाले स्मॉल इनवेस्टर्स के लिए रिटर्न कम आकर्षक हो सकता है।
4. सख्त पेनल्टी नियम, छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी
Budget 2026 में इनकम रिपोर्टिंग से जुड़े पेनल्टी नियमों को और सख्त कर दिया गया है। अगर गलती अनजाने में होती है, तो टैक्स अमाउंट पर 50% तक की पेनल्टी लगेगी। लेकिन अगर इनकम की गलत जानकारी दी गई या मिसरिपोर्टिंग पाई गई, तो पेनल्टी 200% तक हो सकती है।
कैपिटल गेन, क्रिप्टो इनकम, विदेशी एसेट्स या कई तरह के ट्रांजैक्शन करने वाले छोटे निवेशकों के लिए यह बड़ा जोखिम है। टैक्स नियमों की पूरी जानकारी न होने पर की गई छोटी सी गलती भी बड़ा आर्थिक नुकसान करा सकती है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ना तय है।
5. Sovereign Gold Bond पर टैक्स फायदा अब सख्त शर्तों के साथ
बजट में यह भी साफ किया गया है कि Sovereign Gold Bonds पर कैपिटल गेन टैक्स की छूट सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने बॉन्ड ओरिजिनल इश्यू में खरीदे हों और उन्हें मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो।
इसका मतलब यह है कि सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने वाले या बीच में बेचने की योजना रखने वाले निवेशकों को टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा। अब तक SGB स्मॉल इनवेस्टर्स के लिए इसलिए आकर्षक थे क्योंकि इनमें लिक्विडिटी और टैक्स फायदा दोनों मिलता था, लेकिन अब यह फायदा ज्यादा सख्त शर्तों के साथ ही मिलेगा।
New Buyback Rule: बायबैक पर टैक्स का नियम बदला, निवेशकों को राहत या झटका? जानिए एक्सपर्ट सेहिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।