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Budget 2026: शेयर बाजार को बजट से लगा बड़ा झटका, STT बढ़ाने का हुआ ऐलान, ये शेयर 15% तक लुढ़के

Published on 01/02/2026 01:54 PM

STT Hike: यूनियन बजट 2026-27 में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने के प्रस्ताव ने दलाल स्ट्रीट पर हड़कंप मचा दिया है। 1 फरवरी 2026 को पेश हुए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर लगने वाले टैक्स में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स बुरी तरह लुढ़क गए। कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने साफ किया कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में सट्टेबाजी के बढ़ते अंकुश लगाने के उद्देश्य से सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया जाएगा। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम पर STT अब 0.10% के बजाय 0.15% करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शंस एक्सरसाइज पर STT को बढ़ाकर 0.15 परसेंट कर दिया गया है।

टैक्स बढ़ने की खबर आते ही दोपहर में बीएसई सेंसेक्स 2,000 अंकों से ज्यादा गिर गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखा गया और दोपहर 1.15 बजे के करीब यह लगभग 800 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। STT बढ़ने की खबर का सबसे अधिक असर ब्रोकरेज और एक्सचेंज से जुड़े शेयरों पर दिखी।

दोपहर 12:30 बजे के करीब, BSE के शेयर एक झटके में लगभग 14 प्रतिशत तक टूट गए थे। वहीं एंजेल वन, ग्रो और नुवामा जैसे ब्रोकरेज फर्मों के शेयर भी 10 प्रतिशत तक लुढ़क गए। जबकि NSE कैपिटल मार्केट इंडेक्स 6 प्रतिशत नीचे था। Nifty Capital Markets Index कारोबार के दौरान 7 प्रतिशत तक गिर गया।

STT Hike: एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?

डेरिवेटिव ट्रेडिंग को लेकर बढ़ती चर्चा और इसका घरेलू निवेशकों पर बढ़ता असर यह दिखाता है कि सरकार और रेगुलेटर, शेयर बाजार की स्थिरता और छोटे निवेशकों की भागीदारी को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। ग्रीन पोर्टफोलियो PMS के को-फाउंडर और फंड मैनेजर दिवम शर्मा ने कहा कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी भले ही ज्यादा नहीं है, लेकिन यह सरकार की नीति की दिशा जरूर बताती है। इसका मतलब है कि सरकार अचानक सख्त कदम उठाने के बजाय सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर नजदीकी नजर रखना चाहती है।

शर्मा ने आगे कहा कि ब्रोकरेज कारोबार के नजरिए से देखें तो STT में बदलाव का सीधा असर फिलहाल सीमित दिखता है और निकट भविष्य में इससे बिजनेस मॉडल में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। उनके मुताबिक, ज्यादा अहम बात यह होगी कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग से सरकार को अतिरिक्त टैक्स के रूप में आखिरकार कितनी आमदनी होती है। यह बात आने वाले कुछ तिमाहियों के आंकड़ों के बाद ही साफ हो पाएगी।

SEBI के जनवरी 2026 बुलेटिन के अनुसार, दिसंबर 2025 में इक्विटी डेरिवेटिव बाजार में सुस्ती देखने को मिली। इस दौरान NSE और BSE पर इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस प्रीमियम के औसत दैनिक कारोबार (ADT) में महीने-दर-महीने (MoM) आधार पर क्रमशः 11% और 8% की गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, अगर सालाना आधार पर (दिसंबर 2024 की तुलना में) देखें तो ऑप्शंस प्रीमियम का औसत दैनिक कारोबार 11% बढ़ा है, जबकि इक्विटी फ्यूचर्स का औसत दैनिक कारोबार 5% घटा है।

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