Published on 01/02/2026 05:10 PM
Budget Day IT Stocks Shine: रविवार यानी छुट्टी के दिन आज मार्केट खुला लेकिन मार्केट में जरा भी सुस्ती नहीं रही। बजट के ऐलानों पर मार्केट में हड़कंप मच गया लेकिन कुछ खास ऐलानों ने आईटी शेयरों की चमक बढ़ा दी। इसकी वजह ये रही कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने दो ऐसे बड़े ऐलान किए हैं जिसका आईटी सेक्टर को लंबे समय से इंतजार था। वित्त मंत्री ने सेफ हार्बर रूल्स में बदलाव किए हैं। यह टैक्स से जुड़ा एक तकनीकी मामला है लेकिन जिन आईटी कंपनियों का कारोबार देश के बाहर भी है, उनके लिए इसके बड़े मायने हैं।
Safe Harbour क्या है और क्या हैं वित्त मंत्री के दो बड़े ऐलान?
भारत की आईटी कंपनियां हैं जिनकी देश के बाहर सब्सिडरीज यानी विदेशी सहायक कंपनियों या ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) हैं। ये कंपनियां अक्सर अपना मुनाफा विदेशी इकाइयों से भारत में स्थानांतरित (repatriate) करती हैं। सेफ हार्बर नियमों के तहत अगर कोई कंपनी तय की गई सीमा के भीतर प्रॉफिट मार्जिन घोषित करती है, तो टैक्स ऑफिसर्स उस प्राइसिंग को बिना अतिरिक्त जांच या ऑडिट के मानने के लिए बाध्य होते हैं।
अभी तक ये मार्जिन काफी ऊंचे थे। हालांकि अब इस बार के बजट में इसे 17–18% से घटाकर 15.5% कर दिया गया है। यह आईटी कंपनियों के लिए पॉजिटिव ऐलान है, क्योंकि कम मार्जिन दिखाने से उनका टैक्स बोझ कम होता है। 15.5% या इससे अधिक मार्जिन होने पर कंपनियां लंबे समय तक चलने वाले ट्रांसफर प्राइसिंग विवादों से बच सकती हैं, जिससे तुरंत स्पष्टता और लागत में बचत होती है।
एक और अहम ऐलान वित्त मंत्री ने ये किया कि इसकी एलिबिजिलिटी का दायरा बढ़ा दिया। पहले सिर्फ उन्हीं कंपनियों को इसका फायदा मिलता था जिनके लेन-देन ₹300 करोड़ तक थे यानी फायदा मुख्य रूप से छोटी कंपनियों तक सीमित रहता था। अब इसकी लिमिट बढ़ाकर ₹2000 करोड़ की गई है। मॉडर्न GCCs अक्सर सालाना ₹1,000 करोड़ से अधिक की बिलिंग करते हैं, जिससे अब कई मिड-साइज आईटी कंपनियां भी सेफ हार्बर प्रोटेक्शन के दायरे में आ गई हैं।
बाजार को क्यों आया पसंद?
भारत में ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े मुकदमों की दर दुनिया में सबसे अधिक है, और आईटी इंडस्ट्री पिछले एक दशक से इससे जुड़े नियमों में सुधार की मांग कर रहा था। इस बार के बजट में उनकी मांग पूरी हुई जिससे कानूनी रिस्क कम होगा होगा और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार आएगा। टैक्स को छोड़ दें तो यह सरकार के नीतिगत इरादे को दिखाता है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि जिस समय अमेरिका और चीन एआई और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहे हैं, भारत भी सरल नियमों और निश्चितता के साथ खुद को आईटी और एआई सर्विसेज के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में खुद को आगे बढ़ रहा है।
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