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Daily Voice : डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट के कारण RBI के हाथ बंधे, निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम

Published on 23/09/2025 02:06 PM

Daily Voice : ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ और चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट विकास वी गुप्ता ने मनीकंट्रोल को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत में महंगाई में नरमी और विकास को तेजी प्रदान करने की जरूरत को देखते हुए, आरबीआई अपनी दोनों आगामी बैठकों (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में दरों में कटौती करने में काफी सहज होता। लेकिन ब्याज दरों में कटौती का रुपये पर भी नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे रुपये में संभावित गिरावट आ सकती है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में पहले से ही भारी गिरावटआज चुकी है। ऐसे में दरों में कटौती के मामले में निकट भविष्य में आरबीआई के हाथ थोड़े बंधे हुए लग रहे हैं।

उनका यह भी कहना है कि एच1बी वीज़ा शुल्क पर हो रही बातचीत के कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में उम्मीद से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। लेकिन अगर टैरिफ पर राहत मिलती है तो बाजार के मूड में सुधार देखने को मिल सकता है।

ऑटो सेक्टर 28-30 के पीई पर नजर आ रहा महंगा

कई दूसरे सेक्टरों की तुलना में, ऑटो सेक्टर 28-30 के पीई पर बहुत ज्यादा ओवरवैल्यूड नहीं लग सकता है। लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि यह तुलनात्मक रूप से धीमी गति से बढ़ने वाला सेक्टर है। इस सेक्टर की ग्रोथ रेट नॉमिनल जीडीपी से भी धीमी है। सिंगल डिजिट ग्रोथ के लिए लगभग 30 का PE काफी ओवरवैल्यूड है। ऐसे में हमें सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि नए प्रोडक्ट्स खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के लॉन्च से निकट भविष्य में रेवेन्यू और अर्निंग्स में बढ़त हो सकती है, लेकिन इन कंपनियों के लिए फेयर वैल्यू का वैल्यूएशन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।

नितिगत सुधारों के चलते जीडीपी में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद

बाजार पर बात करते हुए विकास गुप्ता ने कहा कि इस समय आयकर स्लैब, जीएसटी और आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती जैसे कई सुधार हुए हैं। जिनसे घरेलू उपभोक्ता मांग में तेज़ी आनी चाहिए। इससे जीडीपी बढ़ सकती है।

आरबीआई को दरों में कटौती में हो सकती है परेशानी, 15% अर्निंग ग्रोथ हासिल करना मुश्किल

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के कारण आरबीआई को ब्याज दरों में कटौती करने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा अमेरिका-भारत ट्रेड को मोर्चे पर दिख रही दिक्कतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती पेश कर रही हैं। इसके साथ ही एच1-बी वीज़ा मुद्दे के कारण आईटी पर पड़ने वाले प्रभाव का असर भारत में हाई लेवल उपभोक्ताओं के एक सबसे बड़े समूह,यानी आईटी वर्कफोर्स पर भी पड़ रहा है।

इसके अलावा, तेल एवं गैस तथा मेटल एंड माइनिंग सेक्टर की अर्निंग ग्रोथ का अनुमान लगाना मुश्किल है। आईटी के साथ-साथ इनका निफ्टी 50 में बड़ा योगदान है। ऐसे में 15 फीसदी अर्निंग ग्रोथ हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन इसके 10-12 फीसदी के सामान्य जीडीपी ग्रोथ रेट से अधिक होने की संभावना है।

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निवेश के लिए पसंदीदा सेक्टर

निवेश के लिए अपने पसंदीदा सेक्टरों पर बात करते हुए विकास गुप्ता ने कहा कि उनको बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, मैन्यूफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और कमर्शियस सर्विसेज से जुड़े शेयर पसंद हैं। इसके अलावा डिफेंस और रेलवे पर सरकारी खर्च लंबी अवधि में भी हाई लेवल पर बना रहेगा। ऐसे में इन सेक्टरों के शेयर भी अच्छे लग रहे हैं।

 

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