Published on 01/02/2026 03:00 PM
Defense Budget : भारत के रक्षा बजट में एक बार फिर दो अंकों की बढ़ोतरी हुई है, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद सैन्य तैयारियों पर सरकार के नए सिरे से फोकस को दिखाता है। आज आए बजट में रक्षा खर्च (पेंशन को छोड़कर) FY26 के 4.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5.9 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें सालाना आधार पर लगभग 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। पिछले एक दशक में, रक्षा बजट लगभग दोगुना हो गया है, जो आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और उच्च ऑपरेशनल तैयारी की दिशा में लगातार हो रही कोशिशों को दर्शाता है।
इस साल एक बड़ा बदलाव कैपिटल खर्च पर ज़्यादा फोकस के रूप में सामने आया है। सरकार ने इस सेक्टर में कैपिटल खर्च के लिए 2.2 लाख करोड़ रुपये रखे हैं, जो FY26 के बजट में रखे गए 1.8 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा है। इससे कुल रक्षा बजट (पेंशन और सिविल डिफेंस खर्च सहित) में कैपिटल खर्च का हिस्सा 26.4 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 28 प्रतिशत हो गया है।
लॉन्ग टर्म ट्रेंड में एक साफ़ स्ट्रक्चरल बदलाव दिखा है। डिफेंस कैपिटल खर्च 2016-17 में 86,357 करोड़ रुपये से दोगुना से ज़्यादा होकर FY27 में 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि इसी दौरान कुल डिफेंस खर्च 3.52 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.8 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया है। कैपेक्स में बढ़ोतरी का कारण एयरक्राफ्ट, नेवल प्लेटफॉर्म, मिसाइल, तोपखाने और दूसरे हाई-वैल्यू इक्विपमेंट के लिए ज़्यादा आवंटन है। साथ ही इसमें सरकार के स्वदेशीकरण एजेंडे के तहत घरेलू खरीद को बढ़ावा देना भी शामिल है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में डिफेंस सेक्टर को लेकर बड़ा बदलाव होुआ है। सरकार ने फोर्स मॉडर्नाइज़ेशन, एयर डिफेंस सिस्टम और नेक्स्ट-जेनरेशन प्लेटफॉर्म पर खर्च को ज्यादा प्राथमिकता दी है।
किसे होगा फ़ायदा ?
डिफेंस सेक्टर में ज़्यादा कैपिटल खर्च से डिफेंस पब्लिक सेक्टर कंपनियों और उनके प्राइवेट-सेक्टर सप्लायर्स दोनों को फ़ायदा पहुंचाने वाला है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की मौजूदा FY25 ऑर्डर बुक 1.25 लाख करोड़ रुपये की है। अगले पांच सालों में फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर और इंजन प्रोग्राम की वजह से इसकी सालाना ऑर्डर पाइपलाइन औसतन लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स को भी इससे फायदा होगा। इसकी मौजूदा ऑर्डर बुक 39,871 करोड़ रुपये की है। सबमरीन, फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर प्रोग्राम के सपोर्ट से इसका सालाना ऑर्डर इनफ्लो लगभग 1.58 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
Budget 2026 Live: बजट में निर्मला सीतारमण ऐसा क्या किया, जो 'हर घर लक्ष्मी जी पधारें'?
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को भी बढ़ते डिफेंस बजट से फायदा होगा। इसका सालाना ऑर्डर इनफ्लो 60,000 करोड़ रुपये के मजबूत स्तर पर रह सकती है। जबकि गोवा शिपयार्ड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स जैसे शिपयार्ड को भी डिफेंस फोर्सेज से बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं। MIDHANI, BEML और भारत डायनेमिक्स जैसी छोटी कंपनियों को भी अच्छे ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। इनको भारत के स्वदेशी खरीद अभियान का फायदा मिलेगा।
डिफेंस PSUs के साथ-साथ, स्टार्टअप्स सहित प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। उम्मीद है कि पहली बार प्राइवेट कंपनियां भारत के रक्षा उत्पादन में लगभग एक चौथाई हिस्से की भागीदारी करेंगी जो FY25 के 23.5 प्रतिशत से ज़्यादा है। इससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत है।
Capital market stocks crash : यूनियन बजट में F&O पर नकेल कसने के लिए STT बढ़ाया गया, कैपिटल मार्केट के शेयर 15% टूटे
डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।