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FIIs ने फरवरी के पहले आधे हिस्से में IT में 10,956 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, होल्डिंग्स चार साल के सबसे निचले स्तर पर आई

Published on 19/02/2026 08:07 AM

IT Stocks : फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने फरवरी के पहले आधे हिस्से में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में 10,956 करोड़ रुपये से ज़्यादा की बिकवाली की है। इस सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली है। निवेशकों के लग रहा है कि जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तेज़ी से हो रही तरक्की से बड़े पैमाने पर इंसानों के दम पर चलने वाली कोडिंग और IT सपोर्ट सर्विसेज़ की मांग कम हो सकती है। बता दें कि यह सेगमेंट भारत के सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स के लिए रेवेन्यू का एक मुख्य सोर्स है। इस डर के चलते ही आईटी शेयरों की जोरदार पिटाई हुई है।

NSDL के आंकड़ों के मुताबिक,इस बिकवाली के चलते 15 फरवरी तक IT स्टॉक्स में FIIs का कुल निवेश घटकर 4.49 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो चार साल का सबसे निचला लेवल है। यह जनवरी 2026 के आखिर के 5.34 लाख करोड़ रुपये से 16 फीसदी कम है।

FIIs 2025 की शुरुआत से लगातार IT स्टॉक्स बेच रहे हैं, इस दौरान कुल मिलाकर लगभग 74,698 करोड़ रुपये की बिक्री हुई है। स्टॉक के हिसाब से हिस्सेदारी में कमी की जानकारी मार्च तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में जारी होने की उम्मीद है।

2025 की शुरुआत में IT स्टॉक्स में FII होल्डिंग्स लगभग 7.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर थीं। आईटी स्टॉक की कीमतों में हालिया गिरावट और लगातार बिकवाली के साथ, उनकी आईटी में FIIs की होल्डिंग्स की वैल्यू 38 परसेंट गिर गई है।

फरवरी में अब तक इंफोसिस में 16.5 परसेंट, TCS में 14 परसेंट और HCL टेक्नोलॉजीज में 14.2 परसेंट की गिरावट आई है। टेक महिंद्रा में 12 परसेंट की गिरावट आई है, जबकि परसिस्टेंट सिस्टम्स और विप्रो में लगभग 10 परसेंट की गिरावट आई है। फरवरी से अब तक निफ्टी IT इंडेक्स में 14 परसेंट की गिरावट आई है।

इस बीच,13 फरवरी तक टॉप 10 IT स्टॉक्स में म्यूचुअल फंड्स का कुल इन्वेस्टमेंट घटकर 3.04 लाख करोड़ रुपये रह गया, जबकि जनवरी 2026 के आखिर में यह 3.56 लाख करोड़ रुपये था। इससे 50,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का अनुमानित नुकसान हुआ।

जेपी मॉर्गन की “लुकिंग थ्रू द AI फॉग” टाइटल वाली रिपोर्ट के मुताबिक,यह सेक्टर कैलेंडर ईयर 2023-25 ​​के दौरान उम्मीद से कम ग्रोथ के तीसरे साल में हो सकता है। ऐसा स्ट्रक्चरल और साइक्लिकल फैक्टर्स के कॉम्बिनेशन के चलते हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई उभरती टेक्नोलॉजीज़ के सही असर और मौजूदा डिमांड फेज़ के समय का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। इसमें यह भी कहा गया है कि एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और इंटीग्रेशन के लिए ज़रूरी IT सर्विसेज़ सपोर्ट की ज़रूरत बनी रहेगी।

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