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F&O की वीकली एक्सपायरी बैन हो जाए, तो भी हैरानी नहीं होगी: जीरोधा के CEO नितिन कामत

Published on 19/09/2025 12:49 PM

जीरोधा (Zerodah) के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामत (Nitin Kamath) का कहना है कि अगर वीकली एक्सपायरी आगे चलकर पूरी तरह बैन हो जाए, तो भी उन्हें हैरानी नहीं होगी। कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि बाकी लोगों की तरह उन्हें भी यह नहीं पता है कि वीकली ऑप्शंस (Weekly Options) का भविष्य क्या होगा। कामत ने कहा कि अगर वीकली एक्सपायरी को पूरी तरह बैन कर दिया जाएगा या फिर इन्हें किसी ऐसे प्रोडक्ट स्यूटेबिलिटी फ्रेमवर्क के तहत ला दिया जाए, जिससे आम लोगों के लिए F&O (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) ट्रेड करना मुश्किल हो जाए, तो भी उन्हें हैरानी नहीं होगी।

कामत ने लिखा, “हमारे जैसे ब्रोकर्स के लिए रेगुलेटरी रिस्क सबसे बड़ा जोखिम है। यह खतरा इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि अधिकतर ब्रोकर्स की कमाई ट्रेडर्स से ही होती है, जबकि निवेशकों से उन्हें लगभग कुछ नहीं मिलता।”

उन्होंने स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जब से वीकली एक्सपायरी की संख्या घटाकर दो कर दी गई है, तब से ऑप्शन वॉल्यूम में करीब 40% की गिरावट आ चुकी है, वह भी बुल मार्केट के दौरान। अगर बाकी बची एक्सपायरी भी हटा दी गईं, तो ऑप्शन वॉल्यूम 2019 के स्तर पर लौट सकता है।

जीरोधा के लिए यह स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि कंपनी म्यूचुअल फंड्स पर कमीशन नहीं लेती और लंबी अवधि के निवेशकों से भी बहुत मामूली चार्ज करती है। कामत ने कहा, “हम बस समय बिता रहे हैं, लेकिन जल्द ही हमें अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।”

पॉलिसी को लेकर कामत ने कहा, “मैं एक ब्रोकरेज फर्म का सीईओ होने के नाते यह कहूंगा कि वीकली एक्सपायरी को प्रोडक्ट स्यूटेबिलिटी फ्रेमवर्क के तहत लाना ठीक लगेगा। लेकिन अगर मैं कोई बाहरी व्यक्ति होता तो, तो मैं इन्हें पूरी तरह हटाने के पीछे के तर्क को समझ पाता।”

इससे पहले जुलाई में कामत ने कहा था कि भारत के डेरिवेटिव मार्केट की तुलना अमेरिका से करना गलत है, क्योंकि भले ही भारत में ऑप्शन ट्रेडिंग का वॉल्यूम बड़ा दिखता हो, लेकिन वास्तविक एक्सपोजर अमेरिका की तुलना में बहुत कम है।

कामत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब SEBI भारतीय डेरिवेटिव्स मार्केट में रिटेल निवेशकों की तेजी से बढ़ती भागीदारी की जांच कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सेबी अगले महीने एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है, जिसमें वीकली F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को खत्म करने पर विचार हो सकता है।

बता दें कि SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने 21 अगस्त को पहली बार संकेत दिया था कि रेगुलेटर लंबी अवधि वाले डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स लाने की संभावना पर विचार कर रहा है।

नितिन कामत के ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-

Many people have been asking me about my view on weekly options and whether they are going away. I am as clueless as everybody else. Having said that, I would not be surprised if they were banned completely, and/or if there is some product suitability framework that makes it… pic.twitter.com/TRFLx9yONL

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