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ग्लोबल अनिश्चितता के बीच शेयर बाजार से मुंह मोड़ रहे निवेशक, FY26 में NSE के नए रजिस्ट्रेशन में 30% की भारी गिरावट

Published on 25/03/2026 09:52 AM

NSE New Investor Drop: भारतीय शेयर बाजार में जारी उथल-पुथल और विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली का असर अब नए निवेशकों के उत्साह पर दिखने लगा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के अनुसार, FY26 में अब तक नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार में 30 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह पिछले तीन वर्षों में आई सबसे तेज गिरावट है।

शेयर बाजार से निवेशकों का घटता रुझान

NSE पल्स के ताजा डेटा के मुताबिक, बाजार में नए खिलाड़ियों की एंट्री काफी धीमी हो गई है। वित्त वर्ष 2025 में जहां 2.12 करोड़ नए निवेशक जुड़े थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में अब तक यह संख्या गिरकर 1.5 करोड़ रह गई है। हालांकि, नए निवेशकों की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन कुल निवेशकों की संख्या बढ़कर 12.78 करोड़ पहुंच गई है जो FY25 में 11.28 करोड़ थी।

नए निवेशक जोड़ने में उत्तर प्रदेश 14.8% के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद महाराष्ट्र 10.6% और तमिलनाडु 7% है। हालांकि, मंथली बेसिस पर यूपी में 22% और गुजरात में 50.4% यूजर्स की भारी गिरावट देखी गई है।

उत्तर भारतीयों का मार्केट में बढ़ रहा दबदबा

पिछले 5 सालों में निवेश के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नए रजिस्ट्रेशन में उत्तर भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 39.8% हो गई है। 5 साल पहले के मुकाबले इसमें करीब 7% का उछाल आया है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों वाले पश्चिम भारत की हिस्सेदारी जो FY21 में 34% थी, वह अब घटकर 21.5% रह गई है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से भी अच्छी संख्या में नए निवेशक जुड़ रहे हैं, जो कुल योगदान का 13.4% है।

बाजार में गिरावट से डर का माहौल

निवेशकों के पीछे हटने की सबसे बड़ी वजह बाजार में हालिया दिनों में आई भारी गिरावट है। पिछले कुछ दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में करेक्शन देखने को मिला है। फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से दोनों सूचकांकों में 10% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।

विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे रिटेल निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार संरक्षणवाद और करेंसी में उतार-चढ़ाव ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार फिलहाल एक कठिन दौर से गुजर रहा है। जहां वैश्विक बाजार AI के दम पर बढ़ रहे हैं, वहीं भारत में इस सेक्टर की कमी और 'AI बबल' फटने के डर से विदेशी फंड मैनेजर सावधानी बरत रहे हैं। कंपनियों के तिमाही नतीजों का कमजोर रहना भी बाजार की तेजी में रोड़ा अटका रहा है।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।