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Gold-Silver ETFs: सोने और चांदी में निवेश का मौका? शुरुआती गिरावट के बाद 10% संभले दाम, जानिए एक्सपर्ट्स की क्या है राय

Published on 02/02/2026 02:00 PM

Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में सोमवार 2 फरवरी को शुरुआती गिरावट के बाद थोड़ी रिकवरी देखने को मिली। दिन के निचले स्तर पर निवेशकों की खरीदारी लौटती हुई दिखाई दी। कई सिल्वर ETF के भाव अपने निचले स्तरों से करीब 10 प्रतिशत तक उबरते नजर आए। एक्सपर्ट्स का का कहना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमती धातुओं का सोने और चांदी का लॉन्ग-टर्म आउटलुक अभी भी पॉजिटिव बना हुआ है।

सुबह के कारोबार में 20 प्रतिशत के लोअर सर्किट को छूने वाला एडलवाइस सिल्वर ETF बाद में करीब 10 प्रतिशत की रिकवरी के साथ 10:30 बजे के आसपास 232.17 रुपये पर ट्रेड करता दिखा। इसी तरह एक्सिस सिल्वर ETF, जो पहले 20 प्रतिशत तक टूट गया था, उसमें भी लगभग 10 प्रतिशत की वापसी देखने को मिली और यह 231.85 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

गोल्ड ETF में भी गिरावट कुछ हद तक सीमित हुई। जहां शुरुआती कारोबार में अधिकतर गोल्ड ETFs करीब 9 प्रतिशत तक टूट गए थे, वहीं 10:40 बजे तक इनमें से अधिकतर में गिरावट घटकर लगभग 5 प्रतिशत रह गई। हालांकि आंशिक रिकवरी के बावजूद अधिकतर गोल्ड और सिल्वर ETF अभी भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

फ्यूचर्स बाजार में भी दिखी हल्की वापसी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी सोने और चांदी के भाव में दिन के निचले स्तरों से कुछ सुधार देखने को मिला। मार्च एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स सुबह के कारोबार में 1,40,001 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गया था। लेकिन फिर यह करीब 3 प्रतिशत संभलकर 1,43,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

हालांकि चांदी के फ्यूचर्स में अभी तक कोई बड़ी रिकवरी देखने को नहीं मिली और यह दिन के निचले स्तरों के आसपास ही कारोबार करता रहा। इससे यह संकेत मिलता कि चांदी में फिलहाल ज्यादा दबाव बना हुआ है।

गिरावट की वजहें अभी भी बनी हुई हैं

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में हालिया गिरावट के पीछे वही कारण अब भी काम कर रहे हैं, जिनकी वजह से पिछले कुछ दिनों में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली, डॉलर में मजबूती और ग्लोबल मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर सख्त संकेतों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का केविन वॉर्श को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की कमान सौंपने के फैसले ने बाजार में सख्त ब्याज दर नीति की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। केविन वॉर्श को दरों में कटौती के मामले में कड़े रुख वाला माना जाता है, जिससे सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली एसेट्स पर दबाव बढ़ा है।

इसके अलावा सीएमई ग्रुप की ओर से मेटल फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ाने का फैसला भी बाजार पर भारी पड़ा है। कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स का मार्जिन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत किया गया है, जबकि कॉमेक्स 5000 सिल्वर फ्यूचर्स का मार्जिन 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया है। ये बदलाव सोमवार को बाजार बंद होने के बाद लागू होने हैं, जिससे ट्रेडिंग लागत बढ़ने और दबाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

बोन्नाजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि सोना और चांदी में आई हालिया “फ्लैश क्रैश” जैसी गिरावट को ट्रेंड के उलटने के बजाय जरूरत से ज्यादा चढ़े बाजार के ठंडा होने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, मौजूदा वोलैटिलिटी के बावजूद कीमती धातुओं का लंबी अवधि का आउटलुक अब भी मजबूत बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीद, चांदी में लगातार सप्लाई की कमी और भू-राजनीतिक तनाव ऐसे कारण हैं जो लंबे समय में कीमतों को मजबूत आधार देते हैं।

वहीं मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स इंडिया में ETFs प्रोडक्ट हेड और फंड मैनेजर सिद्धार्थ श्रीवास्तव का मानना है कि चांदी में हालिया तेज उछाल के बाद सतर्क रुख अपनाना जरूरी था। उन्होंने निवेशकों को कीमती धातुओं में जरूरत से ज्यादा एलोकेशन घटाकर पोर्टफोलियो को लॉन्ग-टर्म रणनीतिक स्तरों के अनुरूप लाने की सलाह दी है। उनके अनुसार, फिलहाल ट्रेंड की और स्पष्टता का इंतजार करना समझदारी होगी और रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो के लिहाज से चांदी इस समय सोना के मुकाबले बेहतर विकल्प दिखाई देता है।

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