News Image
Money Control

IDBI Bank Stake Sale: सरकार को मिलीं वित्तीय बोलियां, क्या Kotak Mahindra Bank की भी है बिड?

Published on 07/02/2026 01:35 PM

सरकार को IDBI Bank के रणनीतिक विनिवेश के लिए वित्तीय बोलियां मिली हैं। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में जानकारी देते हुए कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप इन बिड्स का मूल्यांकन किया जाएगा। IDBI Bank के निजीकरण यानि कि सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री की प्रक्रिया पिछले 3 सालों से अधिक समय से लटकी हुई है। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में LIC के साथ मिलकर इस बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EoI) आमंत्रित किए थे। DIPAM ने जनवरी, 2023 में कहा था कि उसे कई EoI मिले हैं।

IDBI Bank में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री का प्रपोजल सबसे पहले फरवरी 2020 में आया था, जब वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2021 का बजट पेश किया था। 6 फरवरी 2026 को दिन में खबर आई थी कि सरकार इस वित्त वर्ष में IDBI Bank में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया पूरी करने वाली है। कोटक महिंद्रा बैंक, एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स इस हफ्ते 61 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए अपनी फाइनल बिड जमा करने वाले हैं।

अब खबर है कि एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स ने बिड जमा कर दी है। हालांकि कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा है कि उसने IDBI Bank में हिस्सेदारी खरीद को लेकर फाइनेंशियल बिड जमा नहीं की है।

सरकार के पास IDBI Bank में कितनी हिस्सेदारी

वर्तमान में केंद्र सरकार के पास IDBI Bank में 45.48 प्रतिशत और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सरकार IDBI Bank में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकार को लगभग 33,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है। LIC, बैंक में 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है।

Poonawalla Fincorp जुटाएगी ₹5500 करोड़ की इक्विटी कैपिटल, 3 एडवाइजर किए सिलेक्ट

फाइनेंशियल बिड्स जमा होने के बाद अब ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स और एसेट वैल्यूअर्स की वैल्यूएशन के आधार पर, तय प्रक्रिया के अनुसार संबंधित तरीकों का इस्तेमाल करके एक रिजर्व प्राइस तय किया जाएगा। इसके बाद सीलबंद फाइनेंशियल बिड्स को ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स, इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (IMG) के सदस्यों और बिडर्स या उनके ऑथराइज्ड रिप्रेजेंटेटिव्स की मौजूदगी में खोला जाएगा।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सफल बिडर वह होगा, जिसकी बोली सभी वैलिड बिड्स में सबसे ज्यादा होगी और जो रिजर्व प्राइस से ज्यादा होगी। इसके बाद, कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) द्वारा अधिकृत अल्टरनेटिव मैकेनिज्म (AM) मिलेंगे और सबसे ज्यादा कीमत वाली बोली को मंजूरी देंगे। AM में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।