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Investment Tips : सारा पैसा सिर्फ सोने-चांदी में न लगाएं, निवेश के लिए मल्टी-असेट रणनीति को दें प्राथमिकता-एस नरेन

Published on 05/11/2025 01:09 PM

Investment Tips : आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी (ICICI Prudential AMC) के CIO शंकरन नरेन का कहना है कि वर्तमान में सरकारों,खासकर अमेरिका के प्रति ग्लोबल बाजार का भरोसा कम होने से सोने में तेजी देखने को मिली है। इस तरह के भय के चलते आने वाली तेजी टिकाऊ नहीं होती है। 4 नवंबर को मुंबई में मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि वे सोने में निवेश के पक्ष में तो हैं, लेकिन सिर्फ सोने में निवेश के बजाय मल्टी-असेट रणनीति को प्राथमिकता देने की सलाह होगी।

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि मल्टी-एसेट फंडों के अलावा, अकेले सोने-चांदी में निवेश की कोई खास गुंजाइश है। अगर आपको सरकारों पर भरोसा न हो तो वो अलग बात है। उदाहरण के लिए,अगर आपको अमेरिकी सरकार पर भरोसा नहीं है तो आप सोने-चांदी में कुछ पैसा लगा सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो केवल मल्टी-एसेट में ही पैसा लगाना सही होगा। इस समय सोना-चांदी मूल रूप से सरकार-विरोधी निवेश है।"

मल्टी-एसेट निवेश रणनीति पर रहे फोकस

उन्होंने आगे कहा कि सोने और चांदी ने एक दशक तक ऐसा दौर देखा है जिसमें इनकी चाल सपाट रही है। इसलिए इनको लेकर बहुत सावधान रहना होगा। उनका मानना ​​है कि किसी न किसी समय अमेरिका अपनी समस्याओं से निपट लेगा। इसलिए अभी सोने और चांदी में अकेले निवेश नहीं करने की सलाह होगी। इस समय केवल मल्टी-एसेट रणनीति पर फोकस करना चाहिए, क्योंकि किसी न किसी समय सरकारें अपनी समस्याओं का समाधान खोज लेंगी, फिर सोने-चांदी में लंबे समय तक कोई रिटर्न नहीं मिलेगा।

हमारे बाजार में बुलबुले जैसी कोई स्थिति नहीं

भारत के बाजार पर बात करते हुए एस नरेन ने कहा कि हमारे बाजार में बुलबुले जैसी कोई स्थिति नहीं है। हमारा बाजार एक परिपक्व बुल मार्केट है जहां निवेश के लिए कई अच्छे थीम और सेक्टर देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने बताया, "हम तब खरीदारी करते हैं जब निवेशक वर्षों तक कोई रिटर्न न मिलने से निराश होकर अंततः बाहर निकल जाते हैं।" इस समय हमें ऐसे ही कई अवसर फाइनेंशियल, कंजम्प्शन,कैपिटल गुड्स, मेटल और तेल एवं गैस जैसे सेक्टरों में दिखाई दे सकते हैं।

भारतीय के लिए तात्कालिक जोखिम घरेलू नहीं, ग्लोबल इवेंट्स पर रहे नजर

नरेन के मुताबिक अगले दशक में बाज़ारों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अमेरिकी AI शेयरों का क्या रुख होगा। AI आगे ग्लोबल बाजारों की दिशा तय करेगा। भारत में आगे हमें मध्यम स्तर का रिटर्न देखने को मिल सकता है। एसेट एलोकेशन निवेश का सबसे अच्छा तरीका है। भारतीय बाजार के लिए तात्कालिक जोखिम घरेलू नहीं हैं, हमें ग्लोबल इवेंट्स से ही झटका लग सकता है।"

 

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