Published on 18/02/2026 10:58 AM
IT stocks : भारतीय IT कंपनियों के शेयर दो सेशन की बढ़त के सिलसिले को तोड़ते हुए 18 फरवरी को नीचे फिसल गए हैं। सॉफ्टवेयर स्टॉक्स में ग्लोबल टेक सेलऑफ के बाद भारतीय आईटी शेयरों में भी गिरावट आई है। एंथ्रोपिक के क्लाउड सॉनेट 4.6 को फ्री और पेड दोनों तरह के यूज़र्स के लिए लॉन्च करने से सेक्टर में AI की वजह से होने वाली रुकावट को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं।
आईटी शेयरों में आई गिरावट से निफ्टी IT इंडेक्स सुबह 10.05 बजे लगभग 2.5 प्रतिशत गिरकर 32,265.20 पर नजर आ रहा था। परसिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर सबसे ज़्यादा गिरे है। ये शेयर 3 प्रतिशत से ज़्यादा टूटा है। इसके बाद हैवीवेट इंफोसिस के शेयर भी गिरे हैं जो सुबह के ट्रेडिंग ऑवर में लगभग 3 प्रतिशत नीचे दिख रहा है।
कोफोर्ज, टेक महिंद्रा और LTI माइंडट्री के शेयर भी लगभग 3 प्रतिशत गिरे हैं। जबकि HCL टेक्नोलॉजीज, विप्रो और एम्फैसिस के शेयर 2 प्रतिशत से ज़्यादा टूटे हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के शेयर लगभग 2 प्रतिशत गिरे हैं।
एंथ्रोपिक ने लॉन्च किया क्लाउड सॉनेट 4.6
एंथ्रोपिक ने मंगलवार को क्लॉड सॉनेट 4.6 पेश किया, इसे अब तक का सबसे काबिल सॉनेट मॉडल बताया गया है। इस मौके पर AI स्टार्टअप एंथ्रोपिक ने कहा कि यह कोडिंग, कंप्यूटर इस्तेमाल, लॉन्ग-कॉन्टेक्स्ट रीज़निंग, एजेंट प्लानिंग, नॉलेज वर्क और डिज़ाइन में मॉडल की स्किल्स का पूरा अपग्रेड है।
क्लाउड सॉनेट 4.6 अब फ्री और प्रो प्लान वाले सभी कस्टमर्स के लिए claude.ai और क्लाउड कोवर्क में डिफ़ॉल्ट मॉडल होगा, और इसकी कीमत सॉनेट 4.5 जैसी ही रहेगी, जो $3/$15 प्रति मिलियन टोकन से शुरू होगी।
एंथ्रोपिक ने कहा कि सॉनेट 4.6 अपने यूज़र्स को बेहतर कोडिंग स्किल्स देगा। कंसिस्टेंसी, इंस्ट्रक्शन फॉलो करने और दूसरी चीज़ों में सुधार की वजह से अर्ली एक्सेस वाले डेवलपर्स सॉनेट 4.6 को इसके पिछले वर्शन से कहीं ज़्यादा पसंद करते हैं। वे इसे नवंबर 2025 के कंपनी के सबसे स्मार्ट मॉडल, क्लॉड ओपस 4.5 से भी ज़्यादा पसंद करते हैं।
सॉनेट 4.6 के लॉन्च के बाद,दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों में गिरावट आई है। कॉग्निजेंट के शेयर 2.06 प्रतिशत और एक्सेंचर के शेयर 1.94 प्रतिशत गिरे हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक NAB के एनालिस्ट का कहना है कि AI से जुड़ी अनिश्चितता टेक शेयरों में उतार-चढ़ाव का एक बड़ा कारण बनी हुई है। हमें यह पता लगाने में मुश्किल हो रही है कि नए डेवलपमेंट से कौन सी AI कंपनियां जीतेंगी और कौन हारेंगी। साथ ही यह भी जानना मुश्किल है कि AI का दूसरी कंपनियों और अर्थव्यवस्था के अललग-अलग सेक्टर पर कैसा असर पड़ेगा।
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