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इंट्राडे ट्रेडर्स को जेरोधा ने दिया झटका, 1 अप्रैल से F&O ब्रोकरेज चार्ज होगी दोगुनी; जानें किन ट्रेडर्स पर पड़ेगा असर

Published on 25/03/2026 12:08 PM

Zerodha: जेरोधा ने अपने इंट्राडे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडर्स के लिए ब्रोकरेज चार्ज में बदलाव का ऐलान किया है। कंपनी ने लंबे समय से चली आ रही ₹20 के कैप को बढ़ाकर ₹40 प्रति ऑर्डर कर दिया है। हालांकि, राहत की बात ये है कि यह बढ़ा हुआ चार्ज सभी के लिए नहीं, बल्कि केवल 'चुनिंदा' ट्रेडर्स पर ही लागू होगा। नए बदलाव एक अप्रैल से लागू होंगे।

1 अप्रैल से क्या बदल रहा है?

Zerodha ने साफ किया है कि नया ब्रोकरेज नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।

पुराना चार्ज: ₹20 प्रति ऑर्डर।

नया चार्ज: ₹40 प्रति ऑर्डर, केवल उन ट्रेडर्स के लिए जो नियमों का पालन नहीं करेंगे।

किनके लिए नहीं बदलेगा दाम: जो ट्रेडर्स SEBI के मार्जिन नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं, उन्हें पहले की तरह ही ₹20 ब्रोकरेज देना होगा।

50% कैश कोलैटरल जरूरी, नहीं तो ₹40 प्रति ऑर्डर लगेगा चार्ज

ब्रोकरेज बढ़ने का सीधा संबंध सेबी के 'मार्जिन' नियमों से है। सेबी के नियमों के अनुसार, इंट्राडे पोजीशन के लिए ट्रेडर्स को अपने कोलैटरल यानी जमानत राशि का कम से कम 50% हिस्सा कैश या कैश के बराबर लिक्विड फंड में रखना अनिवार्य है। अब तक जेरोधा उन ट्रेडर्स की मदद करता था जिनके पास पर्याप्त कैश नहीं होता था। कंपनी अपने फंड का इस्तेमाल कर रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करती थी और ग्राहकों से एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लेती थी। 1 अप्रैल से जेरोधा यह मदद बंद कर रहा है। जो ट्रेडर्स 50% कैश मेंटेन नहीं करेंगे, उन्हें दंड के तौर पर ₹40 प्रति ऑर्डर ब्रोकरेज देना होगा।

Zerodha ने क्यों उठाया यह कदम?

सेबी की सख्ती: सेबी अब ब्रोकर्स को क्लाइंट्स के ट्रेड के लिए अपना फंड इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे रहा है।

घटता रेवेन्यू: पिछले कुछ समय में F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हुआ है, जिससे जेरोधा की ब्रोकरेज कमाई में करीब 40% की गिरावट आई है।

बदलते नियम: एक्सचेंज फीस रिबेट का खत्म होना और डेरिवेटिव्स पर बढ़ते टैक्स ने ब्रोकर्स के बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ा दिया है।

नितिन कामथ ने दी बड़ी चेतावनी!

जेरोधा के सीईओ नितिन कामथ ने पहले ही आगाह किया था कि रेगुलेटरी बदलावों के कारण कंपनी के बिजनेस पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि भविष्य में 'जीरो-फी इक्विटी डिलीवरी' मॉडल को बचाए रखना भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है। हालांकि, कामथ ने यह भी स्पष्ट किया कि Zerodha पर कोई कर्ज नहीं है, इसलिए आरबीआई के नए लेंडिंग नियमों का ग्राहकों पर कोई सीधा असर नहीं होगा।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।