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Jio के IPO की तैयारी तेज, रिलायंस ने 6 इनवेस्टमेंट बैंकों के साथ मिलाया हाथ: रिपोर्ट

Published on 16/03/2026 06:00 PM

Reliance Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लाने की तैयारी तेज कर दी है। ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि इस संभावित आईपीओ के लिए कंपनी अभी करीब छह बैंकों के साथ काम कर रही है। आगे चलकर इस प्रक्रिया में कुछ और सलाहकार भी जोड़े जा सकते हैं।

रिपोर्ट में सूत्रों ने बताया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज इस प्रस्तावित आईपीओ के लिए BofA सिक्योरिटीज, सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, JM फाइनेंशियल, कोटक महिंद्रा कैपिटल और मॉर्गन स्टैनली के साथ मिलकर काम कर रही है। ये सभी बैंक इस बड़े आईपीओ का स्ट्रक्चर और योजना तैयार करने में कंपनी की मदद कर रहे हैं।

भारत का सबसे बड़ा IPO हो सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है। यह पिछले 20 सालों में पहली बार होगा, मुकेश अंबानी की अगुआई वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की किसी बड़ी सहायक कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस IPO की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सरकार ने लिस्टिंग नियमों में बदलाव को मंजूरी दे दी है। नए नियम के तहत बड़ी कंपनियां अब लिस्टिंग के समय अपनी सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी बेचकर भी बाजार में आ सकती हैं।

संभावित वैल्यूएशन

बैंकरों के मुताबिक जियो प्लेटफॉर्म्स का संभावित वैल्यूएशन लगभग 170 अरब डॉलर तक हो सकता है। अगर कंपनी न्यूनतम हिस्सेदारी बेचती है, तो इस आईपीओ के जरिए लगभग 4.3 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं।

रिपोर्ट में सूत्रों ने बताया कि आईपीओ का स्ट्रक्चर और शर्तें तय होने के बाद कंपनी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट आवेदन जमा कराएगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि प्रस्तावित आईपीओ की समयसीमा और अंतिम शर्तों में अभी बदलाव संभव है। बैंकों और रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से इस खबर पर तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

IPO बाजार की मौजूदा स्थिति

भारत का आईपीओ मार्केट पिछले दो सालों की रिकॉर्ड तेजी के बाद 2026 की शुरुआत में थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक इस तिमाही में अब तक आईपीओ के जरिए करीब 1.7 अरब डॉलर जुटाए गए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 2.3 अरब डॉलर था।

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