Published on 02/03/2026 12:11 PM
Market Crash: मिडिल ईस्ट में जंग के बढ़ते हालात के बीच शेयर बाजारों में भी भारी उठापटक की आशंका तेज हो गई है। नारनोलिया फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शैलेंद्र कुमार का मानना है कि अगर हालात जल्दी नहीं संभले तो भारतीय शेयर बाजार में 5% तक की बड़ी गिरावट भी संभव है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका–इजराइल गठबंधन और ईरान के बीच बड़े स्तर की युद्ध की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर सकता।”
“रेड लाइन” पार होने से बढ़ी अस्थिरता
कुमार ने कहा कि मौजूदा स्थिति को खास तौर पर अस्थिर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि सीमित सैन्य कार्रवाई और खुले युद्ध के बीच की सीमा पहले ही पार हो चुकी है। अमेरिका–इजराइल हमले में ईरान के सीनियर लीडरशिप की मौत एक बड़ी “रेड लाइन” मानी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अमेरिका के एक एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमले का दावा किया है, जिसे भले ही वॉशिंगटन ने मना कर दिया हो, लेकिन यह दिखाता है कि हम कितना खतरनाक टकराव देख रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने भी अपने कुछ सैनिकों की मौत पुष्टि की है, जिससे अमेरिका पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है, जो रणनीतिक संयम को कमजोर कर सकता है।
कुमार के मुताबिक, इतिहास बताता है कि कई बड़े युद्ध पहले से प्लान्ड नहीं थे, बल्कि परिस्थितियों के चलते धीरे-धीरे बढ़ते गए। मौजूदा हालात भी उसी दिशा में जा सकते हैं।
शेयर बाजार में 5% गिरावट की आशंका
उन्होंने कहा कि शेयर के मौजूदा वैल्यूएशन, उसे ज्यादा सुरक्षा कवच नहीं देते। निफ्टी इस समय अपने ट्रेलिंग पी/ई के लगभग 22 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी 500 का पी/ई 23.5 है और निफ्टी मिडस्मॉल 400 का पी/ई करीब 30 पर है।
उन्होंने कहा कि अगर खाड़ी इलाके में जंग लंबा खिंचता है और इसका कोई जल्द समाधान नहीं निकलता, तो बाजार में 5% तक की गिरावट “मुमकिन और वास्तविक” नतीजा हो सकती है।
2026 के लिए 10–15% रिटर्न की उम्मीद बरकरार
हालांकि तनाव के बावजूद कुमार का मानना है कि दिसंबर 2026 तक निफ्टी में 10% से 15% तक की बढ़त संभव है। उनका आकलन है कि अगले चार तिमाहियों में निफ्टी की अर्निंग्स 12% से अधिक बढ़ सकती है। ऐसे में दिसंबर 2026 के लिए निफ्टी का अनुमानित पी/ई लगभग 19.6 रहेगा, जो लार्ज-कैप शेयरों के लिए आकर्षक वैल्यूएशन स्तर माना जा सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
कुमार ने सलाह दी कि मिड और स्मॉल कैप शेयरों में वैल्यूएशन काफी ऊंचे हैं, इसलिए निवेशकों वहां सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि, लार्ज-कैप शेयरों में किसी भी गिरावट को “अच्छा खरीदारी अवसर” माना जा सकता है। उनके अनुसार, पिछले 18 महीनों में लार्ज-कैप भारतीय शेयरों में टाइम करेक्शन हो चुका है, जिससे वैल्यूएशन अधिक संतुलित और टिकाऊ स्तर पर आ गए हैं।
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