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Middle East Crisis: शेयर बाजार बेरहम, इनवेस्टर्स लाचार, आखिर इस दर्द की दवा क्या है?

Published on 14/03/2026 11:57 AM

शेयर बाजार में जारी गिरावट से इनवेस्टर्स हैरान हैं। इस हफ्ते सेंसेक्स करीब 4000 प्वाइंट्स गिर चुका है, जबकि निफ्टी 5 फीसदी फिसला है। कई सालों बाद किसी एक हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार इतना गिरा है। इससे पहले 2020 में कोविड की शुरुआत में मार्केट में बहुत तेज गिरावट आई थी। खास बात यह है कि छोटे-बड़े सभी शेयरों में गिरावट है। इनवेस्टर्स इस गिरावट से काफी निराश हैं।

इस बार हर एसेट क्लास में गिरावट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी हर एसेट क्लास में कमजोरी है। 28 फरवरी के बाद से सोने और चांदी में कमजोरी आई है। डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है। 13 मार्च को यह 92.43 के सबसे निचले स्तर पर आ गया। मार्च में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 1.5 फीसदी कमजोर हो चुका है। ऐसा कम होता है, जब सभी एसेट क्लास में एक साथ गिरावट आती है। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर शेयरों में गिरावट आती है, लेकिन सोना चढ़ता है।

रुपया ऑल-टाइम लो पर आया

एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई नहीं रुकती है तो हालात और खराब हो सकते हैं। मार्केट पर सबसे ज्यादा असर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का पड़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है तो डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 95 के स्तर तक जा सकता है। इसका इकोनॉमी पर खराब असर पड़ सकता है। इससे आयात करना महंगा होगा। आयातित चीजों की कीमतें बढ़ जाएगी, जिससे इनफ्लेशन बढ़ सकता है।

FIIs की मार्च में 52,000 करोड़ बिकवाली

बाजार में गिरावट की दूसरी वजह विदेशी फंडों की बिकवाली है। इस महीने विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार में करीब 52,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। इसका सबसे ज्यादा असर दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर दिखा है। मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट आई है। एलएंडटी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 13 मार्च को एलएंडटी के अलावा जिंदल स्टील, SBI, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

बॉटम का इंतजार करने से चूक सकते हैं मौका

इस समय निवेशकों के लिए धैर्य बनाए रखना होगा। ट्रस्टलाइन होल्डिंग्स के सीईओ एन अरुणागिरि ने कहा कि इससे पहले के क्राइसिस को देखने से पता चलता है कि लड़ाई के शुरुआती दिनों में बाजार में तेज गिरावट देखने को मिलती है। इस बार बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा हाथ क्रूड की बढ़ती कीमतों का है। उन्होंने कहा कि यह समय निवेश करने का है, न कि बॉटम का इंतजार करने का है।

ऐसा मौका बार-बार नहीं आता है

बॉटम के इंतजार का मतलब यह है कि कई इनवेस्टर्स गिरावट के मौके का फायदा इसलिए नहीं उठा पाते, क्योंकि उन्हें लगता है कि मार्केट और गिरेगा फिर वे निवेश करेंगे। ऐसा समय कभी नहीं आता, जिससे मौका उनके हाथ से निकल जाता है। बाद में उन्हें अफसोस होता है। कोविड की गिरावट के समय कई निवेशक निवेश के मौका का फायदा उठाने से चूक गए थे। फिर, मार्केट में रिकवरी के दौरान शेयरों की कीमतें काफी ऊपर चली गई थीं।

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निवेश में इन बातों का रखना होगा ध्यान

निवेशकों को हालांकि, निवेश में सावधानी बरतने की सलाह है। अरुणागिरि ने कहा, "निवेश में सेलेक्टिव होना जरूरी है। दूसरा, एक बार में पूरा पैसा निवेश की जगह धीरे-धीरे निवेश करना होगा।" एक्सिस म्यूचुअल फंड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले 15 सालों में भारतीय बाजार ने कई बड़े जियोपॉलिटिकल इवेंट्स देखे हैं। हर बार शेयर बाजार क्राइसिस से बाहर निकलने में कामयाब रहा। कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ, इकोनॉमी की ग्रथ और सरकार की पॉलिसी से बाजार में फिर से रौनक आती है। अनिश्चितता के बीच बाजार में निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों ने रिकवरी आने पर शानदार कमाई की है।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।