Published on 15/03/2026 12:08 PM
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च के पहले 15 दिनों में घरेलू शेयर बाजार से 52,704 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके पीछे कारण हैं- पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका। इससे पहले फरवरी में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो 17 महीने का उच्च स्तर था।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर 2025 में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे। मार्च महीने में अब तक (13 मार्च तक) FPI ने भारतीय शेयर बाजारों में लगभग 52,704 करोड़ की सेलिंग की है।
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि FPI की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एंजल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक संघर्ष की आशंकाओं ने ब्रेंट क्रूड को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया। इसके अलावा रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास कमजोर बना हुआ है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने के बीच FPI अब बिकवाली कर रहे हैं।
जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका ने FPI की धारणा को प्रभावित किया है। पिछले 18 माह में विकसित और उभरते बाजारों की तुलना में भारत से कमजोर रिटर्न की वजह से भी FPI की दिलचस्पी कम हुई है। दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन को अभी ज्यादा आकर्षक बाजार के रूप में देखा जा रहा है।
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मार्च के दूसरे हिस्से के लिए आउटलुक सतर्क
हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि भारत में FPI की सेलिंग शॉर्ट टर्म के लिए ही रहने की संभावना है।अच्छी बात यह है कि फाइनेंशियल शेयरों में FPI की भारी बिकवाली से घरेलू निवेशकों के लिए वैल्यूएशन आकर्षक हो गए हैं। वकारजावेद खान का कहना है कि मार्च के दूसरे हिस्से के लिए आउटलुक सतर्क बना हुआ है। अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है या बैंकिंग और कंजम्पशन सेक्टर से Q4 की कमाई उम्मीद से बेहतर रहती है, तो आउटफ्लो कम हो सकता है। हालांकि, तेल की कीमतों में कोई और उछाल या फिर से पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता बिकवाली के दबाव को बढ़ा सकती है।हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।