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Nifty Outlook: ट्रंप के बयान के बाद कैसी रहेगी निफ्टी की चाल? एक्सपर्ट से जानिए अहम लेवल

Published on 23/03/2026 08:49 PM

Nifty Outlook: एक दिन की राहत के बाद निफ्टी 50 इंडेक्स में तेज गिरावट देखने को मिली। सोमवार को यह 600 अंक से ज्यादा यानी करीब 2.60 प्रतिशत गिरकर 22,512 पर बंद हुआ। यह स्तर 9 अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचला है। दिन के दौरान बाजार में थोड़ी रिकवरी की कोशिश हुई, लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं सकी। आखिर में इंडेक्स दिन के निचले स्तरों के आसपास बंद हुआ।

कमजोर शुरुआत के बाद बढ़ी गिरावट

हफ्ते के पहले कारोबारी सत्र में निफ्टी करीब 300 अंक की गिरावट के साथ खुला था। इसके बाद पूरे सत्र में बाजार पर दबाव बना रहा और गिरावट लगातार बढ़ती गई।

अब निफ्टी अपने ऑल टाइम हाई 26,373 से करीब 15 प्रतिशत नीचे आ चुका है। यह धीरे-धीरे अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 21,743 के करीब पहुंच रहा है।

कुछ शेयरों को छोड़कर बाकी में गिरावट

निफ्टी 50 में ज्यादातर शेयरों में गिरावट रही। सिर्फ कुछ शेयर ही बढ़त के साथ बंद हो सके। HCL Technologies, Power Grid और ONGC ऐसे शेयर रहे, जिनमें तेजी देखने को मिली। वहीं Titan, Shriram Finance और Trent के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

सभी सेक्टरों पर दिखा दबाव

सोमवार को लगभग सभी सेक्टरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। खासकर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल, रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज और PSU बैंकिंग सेक्टर में तेज गिरावट ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया।

ब्रॉडर मार्केट में गिरावट और ज्यादा तेज रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 3.90 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 3.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

रुपये में भी रिकॉर्ड कमजोरी

इस दौरान रुपये में भी भारी कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया 93.9750 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता ने भारतीय बाजारों में बिकवाली को और तेज कर दिया। इसके अलावा खाड़ी देशों की कुछ अर्थव्यवस्थाओं में लिक्विडिटी की जरूरत को लेकर बाजार में चल रही चर्चाओं ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसने दबाव को और बढ़ा दिया।

मंगलवार के लिए बाजार का आउटलुक

आने वाले समय में बाजार में दबाव और अस्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से तय हो रही है। इसी वजह से निवेशकों का मूड सतर्क बना हुआ है।

बाजार में बनी रह सकती है अस्थिरता

मोतीलाल ओसवाल के सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि बाजार की स्थिति फिलहाल नाजुक बनी हुई है। निकट अवधि में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और गिरावट का जोखिम भी बना रह सकता है।

निफ्टी पर अभी भी बिकवाल हावी

HDFC सिक्योरिटीज के विनय राजानी के मुताबिक निफ्टी फिलहाल बिकवालों के दबाव में है। दिन के दौरान होने वाली हर छोटी रिकवरी में भी बिकवाली देखने को मिल रही है। खासकर, जब इंडेक्स ने 22,930 का अहम सपोर्ट स्तर तोड़ दिया।

उनका कहना है कि अब निफ्टी के लिए अगला सपोर्ट करीब 22,400 के आसपास दिखाई दे रहा है। अगर यह स्तर भी टूटता है तो इंडेक्स अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 21,743 की तरफ बढ़ सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 22,850 से 22,900 का दायरा अब मजबूत रेजिस्टेंस बन गया है।

22,680 के नीचे रहने पर गिरावट का दबाव

SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह का कहना है कि 22,650 से 22,680 का जोन फिलहाल निफ्टी के लिए तात्कालिक रेजिस्टेंस की तरह काम करेगा।

जब तक इंडेक्स 22,680 के नीचे कारोबार करता रहेगा, तब तक बाजार पर गिरावट का दबाव बना रह सकता है। ऐसे में निकट अवधि में निफ्टी 22,350 तक और उसके बाद 22,200 तक जा सकता है।

हालांकि अगर इंडेक्स 22,680 के ऊपर मजबूती से निकलता है तो 22,850 तक रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर यह तेजी टिकाऊ नहीं रहती तो इसे सिर्फ तकनीकी सुधार माना जाएगा।

22,500 के आसपास अहम सपोर्ट

HDFC सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी का कहना है कि बाजार का मूल रुझान अभी भी कमजोर बना हुआ है। फिलहाल निफ्टी 22,500 के अहम सपोर्ट के आसपास कारोबार कर रहा है।

यह स्तर 11 अप्रैल 2025 के पिछले अपसाइड गैप के करीब भी आता है। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे फिसलता है तो निकट अवधि में इंडेक्स 22,000 से 21,800 के दायरे तक जा सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 22,700 से 22,800 का दायरा फिलहाल अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है।

ट्रंप के बयान के बाद GIFT निफ्टी में उछाल

इस बीच GIFT निफ्टी में तेज उछाल देखने को मिला है। आम तौर पर इसे अगले कारोबारी सत्र के लिए बाजार के शुरुआती संकेत के तौर पर देखा जाता है। भारत में बाजार बंद होने के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया, जिसके बाद GIFT निफ्टी 650 अंक से ज्यादा उछल गया।

ट्रंप ने कहा कि पिछले दो सत्रों में ईरान के साथ बातचीत के बाद उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया है कि ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे पर होने वाले सभी सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए।

ट्रंप के इस बयान के बाद जोखिम वाले एसेट्स में तेजी आई। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। हाल ही में तेल की कीमतें कई साल के उच्च स्तर तक पहुंच गई थीं।

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