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NSE IPO: 20 इनवेस्टमेंट बैंक हुए शॉर्टलिस्ट, 7 से 9 लॉ फर्म्स की भी बनी लिस्ट

Published on 12/03/2026 03:35 PM

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने मेगा IPO के लिए करीब 20-21 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया है। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज और मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इंडस्ट्री सोर्सेज ने मनीकंट्रोल को बताया कि इस बंपर इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। आधिकारिक घोषणा जल्द ही होने की उम्मीद है। इससे पहले 26 फरवरी को खबर आई थी कि NSE ने इनवेस्टमेंट बैंकों को एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया है। इसमें उन्हें IPO में रोल के लिए पिच करने के लिए इनवाइट किया गया है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया था कि एक्सचेंज मार्च 2026 के मध्य तक IPO के लिए एडवाइजर चुनने का प्लान बना रहा है। NSE ने फरवरी महीने की शुरुआत में नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और LIC के पूर्व MD तबलेश पांडेय की अध्यक्षता में IPO कमेटी बनाई थी। साथ ही लिस्टिंग प्रोसेस की देखरेख के लिए रॉथ्सचाइल्ड एंड कंपनी को एक इंडिपेंडेंट एडवाइजर अपॉइंट किया था। 11 मार्च को खबर आई कि इनवेस्टमेंट बैंकों के प्रेजेंटेशन शुरू हो गए हैं।

पूरी तरह से OFS होगा NSE IPO

NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि इसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे। IPO का साइज 2.5 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई. और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (LIC), NSE IPO में शेयर बेच सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड भी इस IPO में शेयर बेच सकते हैं। उम्मीद है कि मौजूदा शेयरधारक कंपनी की इक्विटी का 4%-4.5% हिस्सा बेचेंगे। यह भी कहा जा रहा है कि एक्सचेंज के सभी 190,000 शेयरधारकों को IPO के हिस्से के रूप में सेकेंडरी सेल में भाग लेने का विकल्प दिया जाएगा।

NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO 8 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग है। NSE ने दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। पिछले साल अगस्त में, NSE ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए SEBI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था। यह सर्टिफिकेट इसे मिल चुका है। NSE 1992 में शुरू हुआ था और 1994 में इसने भारत के पहले इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर काम करना शुरू किया।

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खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होगा NSE

NSE जब पब्लिक होगा, तो वह अपने शेयर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय नियम इसकी इजाजत नहीं देते हैं। NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) आशीष चौहान के मुताबिक, एक रेगुलेटेड इंस्टीट्यूशन होने के नाते NSE खुद को रेगुलेट नहीं कर सकता है। इसलिए उसे किसी दूसरे एक्सचेंज पर लिस्ट होना होगा। भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत, कॉन्फ्लिक्ट-ऑफ-इंटरेस्ट कारणों से स्टॉक एक्सचेंजों को अपने प्लेटफॉर्म पर खुद को लिस्ट करने की इजाजत नहीं है।

एक्सचेंज को अपने IPO का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करने और फाइल करने में कुछ महीने लगेंगे, जिसके बाद SEBI डॉक्यूमेंट को रिव्यू करेगा और आगे की मंजूरी देगा। चौहान का कहना है कि IPO का मकसद मौजूदा शेयरहोल्डर्स को लिक्विडिटी उपलब्ध कराना है, न कि विस्तार के लिए फंडिंग जुटाना। एक्सचेंज अपने ग्रोथ प्लान को पूरा करने के लिए काफी प्रॉफिट में है।

2025 के लिए एक्सचेंज की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, इसके 11.3 करोड़ यूनीक रजिस्टर्ड इन्वेस्टर थे। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 23 प्रतिशत ज्यादा है। इनवेस्टर अकाउंट लगभग 22 करोड़ थे और NSE प्लेटफॉर्म पर 2,720 कंपनियां लिस्टेड थीं।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।