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सेंसेक्स-निफ्टी में 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट, जंग के बाद अब तक ₹33 लाख करोड़ डूबे

Published on 13/03/2026 05:59 PM

Share Market Fall: भारतीय शेयर मार्केट आज 13 मार्च को लगातार तीसरे दिन भारी गिरावट के साथ बंद हुए। इसके साथ ही सेंसेक्स और निफ्टी अब अपने लगभग 11 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों के मनोबल पर बड़ा असर डाला है।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,471 अंक गिरकर 74,564 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 488 अंक टूटकर 23,151 पर आ गया। निफ्टी पहली बार 7 अप्रैल 2025 के बाद 23,200 के स्तर से नीचे बंद हुआ।

चार साल में सबसे खराब सप्ताह

इस सप्ताह निफ्टी 50 इंडेक्स में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह पिछले चार सालों में शेयर बाजार का सबसे खराब सप्ताह साबित हुआ है। इससे पहले जून 2022 में भी निफ्टी एक सप्ताह में 5 प्रतिशत से अधिक गिरा था। वहीं सेंसेक्स करीब 5.5 फीसदी टूट गया, जो पिछले छह सालों यानी मई 2022 के बाद की सबसे बड़ी वीकली गिरावट है।

लगातार बिकवाली के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस सप्ताह बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग 20 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई। वहीं मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक निवेशकों की संपत्ति में 33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आ चुकी है।

कच्चे तेल की कीमतें बनी बड़ी चिंता

मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत अब लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है।

दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय एनर्जी एजेंसी (IEA) की ओर से आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने और अमेरिका का समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंध हटाने के बावजूद कीमतों में ज्यादा राहत नहीं मिली है।

युद्ध से सप्लाई पर खतरा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान और अमेरिका दोनों की ओर से तनाव कम करने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं, जिससे बाजार में चिंता बनी हुई है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल सप्लाई में बाधा बनी रहती है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।

$150 प्रति बैरल तक जा सकता है तेल

गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर इस महीने के अंत तक होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित रहती है तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थिति ग्लोबल इकोनॉमी और शेयर बाजारों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।

मजबूत डॉलर से इमर्जिंग बाजारों पर दबाव

इस बीच अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी उभरते बाजारों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स फिर से 100 के स्तर के ऊपर पहुंच गया है। मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ रहा है। साथ ही मेटल सेक्टर के शेयरों पर भी दबाव बना हुआ है।

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