Published on 02/03/2026 06:31 PM
Suzlon Energy Shares: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की जानी-मानी कंपनी सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) के निवेशकों के लिए सोमवार का दिन भारी रहा। कंपनी के शेयरों में आज जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इंट्राडे कारोबार में यह स्टॉक करीब 8.3 प्रतिशत टूटकर 40 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल गया। दिन के निचले स्तर पर शेयर 39.13 रुपये तक चला गया, जो मई 2024 के बाद यानी पिछले दो सालों में इसका सबसे निचला स्तर है। हालांकि बाजार बंद होने तक इसमें थोड़ी रिकवरी आई और यह अंत में 3.91 फीसदी की गिरावट के साथ 41 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।
ऊपरी स्तरों से 50% से ज्यादा की गिरावट
सुजलॉन के शेयरों में सुधार की उम्मीद कर रहे रिटेल निवेशकों के लिए आंकड़े चिंताजनक हैं:
ऑल-टाइम हाई से क्रैश: सितंबर 2024 में इस शेयर ने 86 रुपये का अपना ऑलटाइम हाई छुआ था। तब से अब तक इसमें 50% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।
लगातार करेक्शन: पिछले 9 महीनों में से 8 महीने यह स्टॉक लाल निशान में बंद हुआ है।
सालाना प्रदर्शन: कैलेंडर ईयर 2025 में शेयर 15% से ज्यादा गिरा, जो पिछले 5 सालों में इसकी पहली सालाना गिरावट थी। वहीं इस साल यह शेयर अब तक करीब 22 फीसदी टूट चुका है।
प्रोजेक्ट अड़चनों से जूझ रही कंपनी
दिसंबर तिमाही के नतीजे अनुमान के अनुरूप रहे, लेकिन बाजार का भरोसा मजबूत नहीं हो पाया। विश्लेषकों का कहना है कि प्रोजेक्ट कमीशनिंग की रफ्तार उम्मीद से धीमी है। जमीन अधिग्रहण, राइट ऑफ वे और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी बाधाएं परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में चुनौती बन रही हैं।
कंपनी ने हाल ही में नेतृत्व स्तर पर बदलाव भी किया है। अजय कपूर को नया सीईओ नियुक्त किया गया है, जबकि जेपी चालासानी को ग्रुप एग्जीक्यूटिव काउंसिल में नई भूमिका दी गई है।
डिलीवरी बनाम कमीशनिंग: चिंता की वजह
ब्रोकरेज फर्म JM Financial के अनुसार, कंपनी की बड़ी चुनौती डिलीवरी और कमीशनिंग के बीच बढ़ता अंतर है। पिछले सात तिमाहियों में 3,175 मेगावॉट उपकरण सप्लाई किए गए, लेकिन उनमें से केवल 778 मेगावॉट ही चालू हो पाए। ब्रोकरेज का मानना है कि लीडरशिप स्तर पर बदलाव के बावजूद ऑपरेशंस से जुड़ी चुनौतियां तुरंत खत्म होना आसान नहीं है। बार-बार बड़े अधिकारियों के आने-जाने से कंपनी के मुख्य कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।
ब्रोकरेज फर्मों की राय
हालांकि गिरावट के बावजूद, कई बड़े ब्रोकरेज हाउस अभी भी लंबी अवधि के लिए इस स्टॉक पर भरोसा जता रहे हैं, हालांकि उन्होंने अपने टारगेट प्राइस में कटौती की है।जेएम फाइनेंशियल ने शेयर पर 'बाय' रेटिंग बरकरार रखते हुए 64 रुपये का लक्ष्य दिया है, वहीं नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपना टार्गेट घटाकर 55 रुपये कर दिया है। दूसरी तरफ मोतीलाल ओसवाल अब भी इस शेयर पर काफी बुलिस है और उसने 74 रुपये का बड़ा टारगेट प्राइस दिया है। वहीं नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इस 55 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' की रेटिंग दी है।
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