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US-Iran War: ग्लोबल मार्केट में एलएनजी की कीमतों में उछाल से पेट्रोनेट एलएनजी, महानगर गैस के शेयर धड़ाम

Published on 04/03/2026 01:07 PM

मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई की वजह से 4 मार्च को एलएनजी से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दिखी। पेट्रोनेट एलएनजी का शेयर करीब 9 फीसदी फिसला। महानगर गैस का शेयर 8 फीसदी क्रैश कर गया। ग्लोबल मार्केट में एलएनजी की कीमत 2023 के बाद सेबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। मिडिलईस्ट क्राइसिस का असर एलएनजी की सप्लाई पर पड़ रहा है।

इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

सबसे ज्यादा गिरावट Petronet LNG, Mahanagar Gas, GAIL (India) और Indraprastha Gas के शेयरों में आई। पेट्रोनेट एलएनजी का शेयर 12:40 बजे 9.28 फीसदी गिरकर 280 रुपये चल रहा था। महानगर गैस का शेयर 8.57 फीसदी क्रैश कर 1,103 पर चल रहा था। गेल का शेयर 6.39 फीसदी की गिरावट के साथ 154.46 रुपये पर चल रहा था। इंद्रप्रस्थ गैस का शेयर 5.53 फीसदी गिरकर 157 रुपये पर चल रहा था।

ग्लोबल मार्केट में एलएनजी में उछाल

गैस कंपनियों के शेयरों में गिरावट की बड़ी वजह एशियन स्पॉट एलएनजी कीमतों में उछाल है। यह बढ़कर करीब 25.40 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट पहुंच गई है। यह 2023 के बाद से सबसे हाई प्राइस है। मिडिलईस्ट की लड़ाई से होर्मुज की खाड़ी के जहाजों के आवागमन पर असर पड़ा है। उधर, कतर में बड़ी एक्सपोर्ट फैसिलिटीज बंद कर दी गई है।

कतर एलएनजी का बड़ा सप्लायर

ग्लोबल एलएनजी सप्लाई में कतर की करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी है। कतर से ज्यादातर भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई देश एलएनजी खरीदते हैं। ये देश मध्यपूर्व की क्राइसिस को देखते हुए सप्लाई के दूसरे विकल्प की तलाश कर रहे हैं। कतर से सप्लाई नहीं मिलने से सबसे ज्यादा असर भारत और चीन पर पड़ेगा। इससे लंबी अवधि में डायवर्सिफिकेशन पर फोकस बढ़ाना होगा।

भारत पर बढ़ सकता है दबाव

खबरों के मुताबिक, कई एशियाई देशों ने कंटिजेंसी प्लान पर काम करना शुरू कर दिए हैं। इसमें स्पॉट मार्केट में खरीदारी और सप्लाई के वैकल्पिक स्रोत शामिल हैं। इंडिया ने सप्लाई पर दबाव को देखते हुए नेचुरल गैस की राशनिंग शुरू कर दी है। एलएनजी की ढुलाई की कॉस्ट भी काफी बढ़ गई है। डेली फ्रेट रेट्स 40 फीसदी से ज्यादा उछल गए हैं। इसकी वजह होर्मुज की खाड़ी के इस्तेमाल में बाधा है।

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मिडिलईस्ट में लड़ाई थमने के संकेत नहीं 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर मध्यपूर्व में हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं तो इससे भारत, चीन जैसे बड़े देशों में दिक्कत पैदा हो सकती है। 4 मार्च को इजरायल-अमेरिका और ईरान की लड़ाई पांचवें दिन में प्रवेश कर गई। अभी इस लड़ाई के थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। इसका असर दुनियाभर में शेयर और कमोडिटी बाजार पर पड़ रहा है।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।