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Zomato, Swiggy के डिलीवरी वर्कर्स को आखिर हर महीने कितनी होती है कमाई?

Published on 05/01/2026 03:47 PM

स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के ग्राहकों को 31 दिसंबर को दिक्कत का सामना करना पड़ा। इसकी वजह गिग वर्कर्स की हड़ताल थी। उन्होंने पे स्ट्रक्चर्स, इनसेंटिव्स और सोशल सिक्योरिटी को लेकर हड़ताल की थी। इस हड़ताल की वजह से गिग वर्कर्स का मसला लाइमलाइट में आ गया। इस पर लोगों के बीच बहस देखने को मिली। मनीकंट्रोल ने इस पूरे मसले को समझने की कोशिश की है।

 काम के घटों और ऑर्डर वैल्यू पर निर्भर करती है कमाई

मनीकंट्रोल ने इसके लिए कई डिलीवरी वर्कर्स, प्लेटफॉर्म एग्जिक्यूटिव्स और स्टाफिंग फर्मों से बातचीत की। इसके मुताबिक, आज डिलीवर वर्क में एंट्री लेवल पर ठीक कमाई हो जाती है। यह कई फॉर्मल सेक्टर की स्टार्टिंग अर्निंग्स के बराबर है या उससे ज्यादा है। हालांकि, अर्निंग्स ग्रोथ में काम के लंबे घटों और ज्यादा ऑर्डर वैल्यू का हाथ होता है। इस मॉडल में करियर ग्रोथ के लिए सीमित जगह बचती है।

मेट्रो शहरों में मंथली 30,000 तक हो सकती है कमाई

स्टाफिंग प्लेटफॉर्म टीमलीज सर्विसेज के मुताबिक, एक मेट्रो शहर में फुल टाइम डिलीवरी पार्टनर 30,000 रुपये तक की मंथली सैलरी कमा सकता है। हालांकि, यह प्लेटफॉर्म, लोकेशन, काम के घंटों और इनसेंटिव्स पर निर्भर करता है। टीमलीज सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमण्यम ए ने कहा, "मेट्रो सिटी में एक फुल-टाइम डिलीवरी पार्टनर औसतन 20,000-30,000 रुपये के बीच पैसे कमाता है। कुछ मामलों में यह ज्यादा होता है।"

ज्यादातर डिलीवरी वर्कर्स काम में ब्रेक लेते हैं

इटर्नल के फाउंडर और सीईओ दीपेंद्र गोयल ने भी जोमैटो के डिलीवरी वर्कर की अर्निंग्स के बारे में ऐसी बातें बताईं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हाल में एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने बताया कि ज्यादातर वर्कर्स रुक-रुक कर काम करते हैं। लेकिन, जो एक महीने में करीब 10 घंटे तक लॉग-इन रहते हैं वे करीब 26,500 तक कमा लेते हैं। 20 फीसदी फ्यूल और मेंटेनेंस कॉस्ट हटा दी जाए तो उनकी मंथली कमाई करीब 21,000 रुपये आती है।

डिलीवरी वर्कर्स के लिए करियर ग्रोथ के सीमित मौके 

टीमलीज के डेटा के मुताबिक, रिटेल जैसे सेक्टर्स में फ्रेशर्स का शुरुआती टेक-होम पे मंथली 20,000 है, जबकि बीएफएसआई में एंट्री-लेवल रोल में यह करीब 18,000 से 22,000 रुपये है। लेकिन, जहां फॉर्मल सेक्टर रोल में समय के साथ इंक्रीमेंट मिलता है और प्रमोशन जैसे फायदे मिलते हैं, वहीं डिलीवरी वर्कर्स को ऐसे फायदे नहीं मिलते हैं। इसका मतलब है कि काम के ज्यादा घंटों के अलावा इनकम बढ़ाने के दूसरे मौके नहीं होते हैं।

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फुल-टाइम और पार्ट-टाइम वर्क शिड्यूल का विकल्प

डिलीवरी पार्टनर्स फुल टाइम शिड्यूल सेलेक्ट कर सकते हैं, जिसकी शिफ्ट करीब 8 घंटों की होती है। उनके लिए पार्ट टाइम फ्लेक्सी लॉग-इन का विकल्प भी खुला है। एक बार लॉग-इन करने के बाद ऐप की तरफ से ऑर्डर्स एसाइन होते हैं। डिलीवरी वर्कर ऑर्डर रिजेक्ट कर सकता है। लेकिन, बार के रिजेक्शन से पेनाल्टी लग सकती है या ऑर्डर एलोकेशन में कमी आ सकती है। जोमैटो के साथ काम करने वाले एक डिलीवरी वर्कर ने बताया, "आप एक या दो ऑर्डर रिजेक्ट कर सकते हैं। लेकिन अगर आप हमेशा ऐसा करते हैं तो ऐप काम देना बंद कर सकता है।"हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।