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अब 10 ग्राम में भी गोल्ड फ्यूचर्स, NSE को SEBI से मिली मंजूरी; जानिए ट्रेडिंग और डिलीवरी की पूरी डिटेल

Published on 22/02/2026 08:30 PM

NSE Gold Futures: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 16 मार्च 2026 से अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में 10 ग्राम गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने जा रहा है। एक्सचेंज ने सर्कुलर में बताया कि इसके लिए SEBI से मंजूरी मिल चुकी है। यह कदम छोटे साइज के गोल्ड फ्यूचर्स में ट्रेडिंग की सुविधा देने के लिए उठाया गया है, ताकि ज्यादा प्रतिभागी इसमें शामिल हो सकें।

यह कॉन्ट्रैक्ट मंथली सीरीज में उपलब्ध होगा और निवेशकों को सोने में छोटे लॉट साइज के जरिए ट्रेड करने का नया विकल्प देगा।

कॉन्ट्रैक्ट की अहम बातें

Gold 10 grams फ्यूचर्स की ट्रेडिंग और डिलीवरी यूनिट 10 ग्राम होगी। कीमतें एक्स-अहमदाबाद आधार पर कोट होंगी। टिक साइज 10 ग्राम पर 1 रुपये तय किया गया है।

अधिकतम ऑर्डर साइज 10 किलोग्राम रखा गया है। यह कॉन्ट्रैक्ट GOLD10G सिंबल के तहत ट्रेड करेगा और मंथली एक्सपायरी नियमों का पालन करेगा।

ट्रेडिंग समय और एक्सपायरी नियम

इस कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे या 11:55 बजे तक होगी। समय अमेरिका में डे लाइट सेविंग के हिसाब से बदलेगा।

कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी हर महीने के आखिरी कैलेंडर दिन होगी। अगर वह दिन अवकाश है तो एक्सपायरी उससे पहले वाले कारोबारी दिन पर होगी। पुराने कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी के तुरंत बाद अगले कारोबारी दिन नया कॉन्ट्रैक्ट शुरू हो जाएगा।

प्राइस लिमिट और मार्जिन व्यवस्था

इस कॉन्ट्रैक्ट पर बेस डेली प्राइस लिमिट 6 प्रतिशत तय की गई है। अगर यह सीमा पार होती है तो 15 मिनट का कूलिंग ऑफ पीरियड लागू होगा। इसके बाद लिमिट को 9 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा उतार चढ़ाव होता है तो एक्सचेंज नियामकीय प्रावधानों के तहत प्राइस लिमिट में और ढील दे सकता है।

इनिशियल मार्जिन वोलैटिलिटी या SPAN में से जो ज्यादा होगा, उसके आधार पर तय किया जाएगा। इसके अलावा 1 प्रतिशत एक्सट्रीम लॉस मार्जिन भी लगाया जाएगा। ज्यादा अस्थिरता की स्थिति में अतिरिक्त या विशेष मार्जिन भी लागू हो सकता है।

डिलीवरी और सेटलमेंट प्रक्रिया

अब तक कैसा गोल्ड फ्यूचर्स?

अब तक NSE के कमोडिटी सेगमेंट में गोल्ड फ्यूचर्स मुख्य रूप से 1 किलोग्राम (Gold Futures) और 100 ग्राम (Gold Mini) के लॉट साइज में उपलब्ध थे। यानी न्यूनतम ट्रेडिंग यूनिट 100 ग्राम थी, जो रिटेल निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत बड़ी मानी जाती है। अब 10 ग्राम का नया कॉन्ट्रैक्ट आने से लॉट साइज एक और स्तर छोटा हो जाएगा। इससे एंट्री कॉस्ट काफी कम हो सकती है और छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि अब वे छोटे साइज यानी 10 ग्राम के जरिए गोल्ड फ्यूचर्स में ट्रेड या हेजिंग कर सकेंगे, जिससे एंट्री कॉस्ट कम होगी और भागीदारी बढ़ सकती है। छोटे ट्रेडर्स, ज्वैलर्स और रिटेल निवेशकों को जोखिम प्रबंधन का ज्यादा लचीला विकल्प मिलेगा।

अनिवार्य डिलीवरी और तय प्राइस लिमिट से पारदर्शिता बनी रहेगी। वोलैटिलिटी के समय मार्जिन सिस्टम अतिरिक्त सुरक्षा देगा। कुल मिलाकर यह कदम गोल्ड डेरिवेटिव्स बाजार को ज्यादा गहरा और सुलभ बना सकता है।

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