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Automation stocks: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा ऑटोमेशन, इन चार स्टॉक्स पर रखें नजर

Published on 15/03/2026 04:56 PM

Automation stocks: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऑटोमेशन तेजी से अहम भूमिका निभाने लगा है। फैक्ट्रियां अब सिर्फ मैन्युअल लेबर पर निर्भर नहीं हैं। प्रोडक्शन लाइनों में मशीनें, सेंसर, रोबोटिक्स और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे उत्पादन ज्यादा कुशल और सटीक बन रहा है।

यह बदलाव Industry 4.0 के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ा है। इसमें फैक्ट्रियां कनेक्टेड मशीनों, डेटा और सॉफ्टवेयर के जरिए उत्पादन को बेहतर बनाती हैं। जो तकनीक कभी भविष्य की चीज लगती थी, वह अब धीरे-धीरे भारतीय फैक्ट्रियों में हकीकत बनती जा रही है।

आइए उन 4 कंपनियों के बारे में जानते हैं, जिन्हें फैक्ट्रियों में ऑटोमेशन का सबसे अधिक फायदा मिल सकता है। और जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

ABB India

ABB India ऑटोमेशन और पावर टेक्नोलॉजी से जुड़ी इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट्स और सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। दिसंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू करीब 3,557 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है। हालांकि टैक्स के बाद मुनाफा 433 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 528 करोड़ रुपये से कम है।

तिमाही के दौरान कंपनी को मिलने वाले ऑर्डर्स में अच्छी बढ़ोतरी हुई। कुल ऑर्डर लगभग 52 प्रतिशत बढ़े और ऑर्डर बैकलॉग बढ़कर करीब 10,471 करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे आने वाली तिमाहियों के लिए राजस्व की अच्छी दृश्यता मिलती है।

कंपनी को डेटा सेंटर, ट्रांसपोर्टेशन और रेलवे प्रोजेक्ट्स से मांग मिल रही है। इसके अलावा कई इंडस्ट्रियल ग्राहक अपनी प्रोडक्शन लाइनों को ऑटोमेट करने के लिए मोटर, ड्राइव और रोबोटिक्स अपना रहे हैं। कंपनी ने हाल ही में ऊर्जा कुशल ड्राइव सिस्टम और नई पीढ़ी का मशीनरी ड्राइव प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। पिछले एक साल में ABB India के शेयर में लगभग 24.8 प्रतिशत की तेजी देखी गई है।

Siemens

Siemens औद्योगिक टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सिस्टम से जुड़े कई प्रोडक्ट्स और सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू करीब 4,120 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर लगभग 12 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान नेट प्रॉफिट करीब 463 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत ज्यादा है।

तिमाही के दौरान ऑर्डर इनफ्लो मजबूत रहा। मांग ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा सेक्टर से आई। इनमें से कई प्रोजेक्ट्स में उन्नत ऑटोमेशन सिस्टम और डिजिटल कंट्रोल टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है।

रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन और मोबिलिटी प्रोजेक्ट्स कंपनी के लिए अहम क्षेत्र बने हुए हैं। वहीं ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सेक्टर भी डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग टूल्स, रोबोटिक्स और इंडस्ट्रियल सॉफ्टवेयर अपना रहे हैं। पिछले एक साल में Siemens के शेयर में करीब 25.7 प्रतिशत की तेजी आई है।

Honeywell Automation India

Honeywell Automation India की शुरुआत 1987 में Tata और Honeywell के जॉइंट वेंचर के रूप में हुई थी। बाद में Honeywell Asia Pacific Inc. ने Tata की हिस्सेदारी खरीद ली और कंपनी का नाम Honeywell Automation India हो गया। दिसंबर तिमाही में कंपनी का राजस्व करीब 1,169 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर लगभग 7.1 प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि नेट प्रॉफिट 121 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 132 करोड़ रुपये से कम है।

एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के लिए अहम क्षेत्र बनता जा रहा है। कंपनी को भारत के कई एयरपोर्ट्स के लिए एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग प्रोजेक्ट्स मिले हैं, जो रनवे विजिबिलिटी और सुरक्षा को बेहतर बनाते हैं।

इसके अलावा कंपनी नई तकनीकों पर भी काम कर रही है। इसमें बिल्डिंग ऑटोमेशन सॉल्यूशंस, ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर और इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज के लिए फायर, गैस और सर्विलांस सिस्टम शामिल हैं। कंपनी IoT आधारित सिस्टम भी विकसित कर रही है, जो रियल टाइम डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए एसेट एफिशिएंसी बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि पिछले एक साल में Honeywell Automation India के शेयर में लगभग 11.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।

L&T Technology Services

L&T Technology Services एक इंजीनियरिंग सर्विसेज कंपनी है, जो ट्रांसपोर्टेशन, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स, टेलीकॉम, हाई-टेक और मेडिकल डिवाइसेज जैसे क्षेत्रों के लिए इंजीनियरिंग, रिसर्च और डिजिटल सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। दिसंबर तिमाही में कंपनी का राजस्व करीब 2,652 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है। इस दौरान नेट प्रॉफिट करीब 322 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत ज्यादा है।

कंपनी की ग्रोथ इंजीनियरिंग सेवाओं की बढ़ती मांग से समर्थित है। इंडस्ट्रियल कंपनियां ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स में निवेश बढ़ा रही हैं। इसमें रोबोटिक्स इंटीग्रेशन, डिजिटल ट्विन और प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल हैं।

कंपनी के कई प्रोजेक्ट्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमेशन से जुड़े हैं। इसके ग्राहक उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में फैले हुए हैं। हालांकि पिछले एक साल में L&T Technology Services के शेयर में लगभग 20.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

वैल्यूएशन और रिटर्न रेशियो

रिटर्न रेशियो के मामले में ABB India और L&T Technology Services बेहतर स्थिति में हैं। ABB India का ROCE लगभग 29.9 प्रतिशत और ROE 22.4 प्रतिशत है। वहीं LTTS का ROCE 28.3 प्रतिशत और ROE 22.2 प्रतिशत है। Honeywell Automation का ROCE 18.4 प्रतिशत और ROE 13.7 प्रतिशत है। वहीं, Siemens India का ROCE 15.8 प्रतिशत और ROE 11.8 प्रतिशत है।

वैल्यूएशन की बात करें तो अधिकांश स्टॉक्स इंडस्ट्री मीडियन से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। ABB India का EV/EBITDA लगभग 53.9 है। यह इसके पांच साल के औसत 60.7 से कम है, लेकिन इंडस्ट्री मीडियन 18 से काफी ज्यादा है। Siemens का EV/EBITDA 43.5 है, जो इसके पांच साल के औसत 27.4 से ऊपर है।

Honeywell Automation का EV/EBITDA 30.4 है, जो इसके पांच साल के औसत 51.5 से कम है। वहीं L&T Technology का EV/EBITDA 15.8 है। यह भी इंडस्ट्री मीडियन से थोड़ा ज्यादा लेकिन इसके पांच साल के औसत 23.4 से कम है।

क्या आपको इन कंपनियों पर दांव लगाना चाहिए?

इन चारों कंपनियों की भूमिका अलग-अलग है। ABB इलेक्ट्रिफिकेशन और ऑटोमेशन इक्विपमेंट पर फोकस करती है। Siemens औद्योगिक टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस देती है। Honeywell बिल्डिंग और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन सिस्टम प्रदान करती है। L&T Technology Services इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराती है।

ऑटोमेशन और Industry 4.0 का ट्रेंड लंबी अवधि का माना जा रहा है, इसलिए ABB India, Siemens, Honeywell Automation India और L&T Technology Services जैसी कंपनियों के सामने भविष्य में ग्रोथ के मौके बने रह सकते हैं।

हालांकि इन कंपनियों के कई शेयर पहले से ही ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, इसलिए निवेश से पहले उनके बिजनेस ग्रोथ, ऑर्डर बुक, मुनाफे और वैल्यूएशन का संतुलित आकलन करना जरूरी है। लंबी अवधि के नजरिये से यह सेक्टर दिलचस्प जरूर है, लेकिन निवेश का फैसला अपनी रिस्क क्षमता और रिसर्च के आधार पर ही लेना चाहिए।

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