Published on 15/03/2026 03:41 PM
कच्चे तेल की उच्च कीमतों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं कर रही हैं। इसके चलते उन्हें घाटा हो रहा है। इस घाटे को कम करने के लिए वे रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल की आयातित दरों से कम कीमत देने पर विचार कर रही हैं। इस कदम से MRPL (मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड), CPCL (चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और HMEL (HPCL-मित्तल एनर्जी लिमिटेड) जैसी एकल रिफाइनरी कंपनियों पर बुरा असर पड़ सकता है। सोमवार को MRPL और CPCL के शेयरों में गिरावट आ सकती है।
पश्चिम एशिया संकट से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। हालांकि, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इस बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है।
RTP पर रोक/डिस्काउंट की तैयारी
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (RTP) पर रोक लगाने या उस पर छूट तय करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। RTP वह आंतरिक कीमत होती है, जिस पर रिफाइनरियां अपनी मार्केटिंग शाखाओं को ईंधन बेचती हैं। इस कदम का मकसद रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल की आयात-समता लागत से कम भुगतान करना है। यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इस कदम से रिफाइनरियां कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ RTP के जरिए आगे नहीं बढ़ा पाएंगी। उन्हें इस प्रभाव का एक हिस्सा खुद वहन करना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी इंटीग्रेटेड सरकारी कंपनियां अपने रिफाइनिंग और मार्केटिंग ऑपरेशंस के बीच इस घाटे की भरपाई कर सकती हैं। दूसरी ओर MRPL, CPCL और HMEL जैसी एकल रिफाइनरियों का खुदरा बाजार में नहीं के बराबर दखल है। ये रिफाइनरियां अपना ज्यादातर उत्पादन IOCL, BPCL और HPCL को बेचती हैं। ऐसे में उनके मार्जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
अगर RTP पर रोक या छूट प्राइमरी रिफाइनरियों पर भी लागू की जाती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी रिफाइनरी कंपनियां भी प्रभावित होंगी। ये दोनों प्राइवेट कंपनियां अपने उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बेचती हैं।
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होर्मुज स्ट्रेट से यातायात रुकने से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर
मिडिल ईस्ट में US-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुई, जब ईरान पर US और इजरायल ने हमले कर दिए। इसके बाद ईरान ने भी जवाब देते हुए इजरायल पर हमले किए। साथ ही ईरान मध्यपूर्व के कई देशों को भी निशाना बना रहा है। इस युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होने वाला समुद्री यातायात रुक गया है। ईरान ने इस मार्ग पर नाकेबंदी कर रखी है। इसके चलते वैश्विक शिपिंग में बाधाएं आई हैं। इसका असर भारत के कच्चे तेल, LPG और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई पर भी पड़ा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक अत्यंत संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है। यह ईरान और ओमान/यूएई के बीच स्थित है। भारत अब खाड़ी क्षेत्र के पारंपरिक स्रोतों के अलावा अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे नए स्रोतों से ज्यादा LPG कार्गो हासिल कर रहा है। इसके अलावा 14 मार्च को भारतीय नौसेना की सुरक्षा में दो बड़े LPG टैंकर 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' ने सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट को पार किया। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने पुष्टि की है कि ईरान ने भारत के साथ अपने विशेष संबंधों के कारण भारतीय जहाजों को 'नाकेबंदी' से छूट दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है। अन्य देशों के व्यापारिक जहाज इस मार्ग से गुजरने के लिए स्वतंत्र हैं।हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।