News Image
Money Control

Defence Stocks: डिफेंस सेक्टर के ये 3 शेयर दे सकते हैं 44% तक रिटर्न, फिलिप कैपिटल का बड़ा दांव

Published on 19/12/2025 01:15 PM

Defence Stocks: देश के डिफेंस शिपबिल्डिंग सेक्टर को लेकर ब्रोकरेज फर्म फिलिप कैपिटल (Phillip Capital) बेहद बुलिश नजर आ रही है। ब्रोकरेज ने शुक्रवार 19 दिसंबर को जारी एक रिपोर्ट में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड के शेयरों पर कवरेज शुरू की है। ब्रोकरेज ने तीनों शिपबिल्डिंग कंपनियों के शेयरों को "Buy" रेटिंग दी है।

फिलिप कैपिटल का मानना है कि भारत का डिफेंस शिपबिल्डिंग सेक्टर एक “मल्टी-डिकेड ट्रांसफॉर्मेशन” के मुहाने पर खड़ा है और आने वाले सालों में इन कंपनियों के लिए ग्रोथ के बड़े मौके खुल सकते हैं।

ब्रोकरेज ने मझगांव डॉक के शेयर के लिए 3,200 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो इसके शेयरों में मौजूदा स्तर से करीब 36% बढ़त की संभावना को दिखाता है। इसने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स के शेयर के लिए 2,800 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो इसमें 26% की बढ़त की संभावना दिखाता है। वहीं कोचीन शिपयार्ड के शेयर को ब्रोकरेज ने 'Buy' रेटिंग के साथ 2,175 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है, जो इसके शेयरों में मौजूदा स्तर से 44 प्रतिशत बढ़त की संभावना दिखाता है।

ब्रोकरेज का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद ये शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर आ गए हैं। मझगांव डॉक के शेयर अपने रिकॉर्ड हाई लेवल ₹3,775 से 37% नीचे कारोबार कर रहे हैं। वहीं कोचीन शिपयार्ड और गार्डन रीच के शेयर अपने रिकॉर्ड हाई लेवल से क्रमशः 40% और 37% तक टूट चुके हैं।

क्यों बुलिश है Phillip Capital?

फिलिप कैपिटल का कहना है कि भारत का डिफेंस शिपबिल्डिंग सेक्टर कई दशकों के बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। साथ ही यह सिर्फ गवर्नमेंट पॉलिसी पर निर्भर इंडस्ट्री से निकलकर एक स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस पिलर के रूप में बदल रहा है।

ब्रोकरेज ने कुछ अहम आंकड़ों की ओर इशारा किया है। ब्रोकरेज ने कहा कि भारत अपने 95% व्यापार को समुद्री मार्गों से करता है, लेकिन ग्लोबल शिप प्रोडक्शन में भारत की हिस्सेदारी 1% से भी कम है।

भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया के टॉप-पांच शिपबिल्डर्स में शामिल होना है, जो अभी 16वें स्थान पर है। इसके लिए सरकार ने करीब करीब ₹70,000 करोड़ का मैरीटाइम स्टिमुलस पैकेज घोषित किया है, जो भारत और चीन, साउथ कोरिया और जापान जैसे बड़े शिपबिल्डिंग देशों के बीच मौजूद स्ट्रक्चरल गैप को भरने में मदद करेगा।

ब्रोकरेज ने कहा कि भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पहले ही करीब ₹25,000 करोड़ तक पहुंच चुका हैं। नेवल प्लेटफॉर्म और पेट्रोल क्राफ्ट अब स्केलेबल एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स के तौर पर उभर रहे हैं।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा इस समय 60 से अधिक नेवल वेसल बन रहे हैं, और 70-80 नए जहाजों को बनाने की प्लानिंग की जा रही है। इनमें नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट्स, फ्लीट सपोर्ट शिप्स, और दूसरे हाई-वैल्यू प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ब्रोकरेज ने कहा कि करीब ₹2.3 लाख करोड़ की नेवल मॉडर्नाइजेशन पाइपलाइन और 75% डिफेंस खरीद घरेलू कंपनियों के लिए आरक्षित होने से मझगांव डॉक, कोचीन शिपयार्ड और गार्डन रीच को कई सालों तक अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी मिल रही है।

निवेशकों के लिए जोखिम भी बताए

हालांकि फिलिप कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है, जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

- ऑर्डर फाइनलाइजेशन में देरी

- कैपेक्स ग्रोथ की रफ्तार धीमी होना

- लंबे प्रोजेक्ट्स का जेस्टेशन पीरियड

- एक्जिक्यूशन और टेक्नोलॉजी से जुड़ी चुनौतियां

- घरेलू सप्लाई चेन की सीमाएं

- ऑर्डर बुक और क्लाइंट पर अधिक निर्भरता

- पॉलिसी और मार्जिन को लेकर अनिश्चितता

- डेवलपमेंट और इंडिजेनाइजेशन से जुड़े जोखिम

यह भी पढ़ें- Stocks To Buy: 32% ऊपर चढ़ेगा यह रियल एस्टेट स्टॉक, मोतीलाल ओसवाल का दांव, आपके पास है?

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।