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FII के बाद अब DII बने भी बिकवाल! ₹1300 करोड़ के शेयर बेचे, क्या STT में बढ़ोतरी बनी वजह?

Published on 01/02/2026 11:41 PM

डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (DII) शेयर बाजार में रविवार को लगातार दूसरे दिन नेट सेलर रहे। उन्होंने रविवार के कारोबार में DII ने ₹683 करोड़ के शेयर बेचे। इससे पहले शुक्रवार को भी उन्होंने ₹601 करोड़ की बिकवाली की थी। इस तरह दो दिनों में DII की कुल बिकवाली करीब ₹1,300 करोड़ तक पहुंच गई।

इससे पहले DII ने पिछले साल रिकॉर्ड ₹8 लाख करोड़ के शेयर खरीदे थे। वे लंबे समय से विदेशी निवेशकों की बिकवाली को संभालते आ रहे थे। लेकिन, अब उनकी बिकवाली ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

जून 2025 के बाद पहली बार बना ऐसा रिकॉर्ड

रविवार की यह बिकवाली इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि 27 जून 2025 के बाद पहली बार DII लगातार दो ट्रेडिंग सेशनों में नेट सेलर बने हैं। इसके उलट, विदेशी निवेशकों ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में करीब ₹1,600 करोड़ के शेयर खरीदे हैं।

एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, बीते तीन महीनों में DII की औसत रोजाना खरीद करीब ₹3,800 करोड़ रही है। इससे मौजूदा बिकवाली और ज्यादा चौंकाने वाली लगती है।

बिकवाली के पीछे क्या वजह रही?

मार्केट में यह दबाव सरकार के उस प्रस्ताव के बाद देखने को मिला है, जिसमें इक्विटी डेरिवेटिव्स पर टैक्स बढ़ाने की बात कही गई है। इस फैसले ने बाजार का सेंटिमेंट कमजोर कर दिया।

आमतौर पर DII, रिटेल निवेशकों और हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के साथ मिलकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली को बैलेंस करते रहे हैं। लेकिन इस बार वे भी सतर्क नजर आए।

STT बढ़ोतरी से बाजार में तेज उतार-चढ़ाव

बजट में इक्विटी फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके बाद बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 करीब 2% टूट गया, जो 2020 के बाद बजट वाले दिन की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

इस दबाव में BSE Ltd. के शेयर करीब 8% गिर गए। वहीं, कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों जैसे Angel One और Nuvama Wealth Management में 7% से 9% तक की गिरावट दर्ज की गई।

STT बढ़ाने के पीछे सरकार का मकसद क्या है?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम तेजी से बढ़ती सट्टेबाजी को काबू में करने के लिए उठाया गया है। हाल के वर्षों में रिटेल निवेशकों की भारी भागीदारी के चलते भारत कॉन्ट्रैक्ट्स के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स मार्केट बन गया है।

JM Financial के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर विशाल कंपानी के मुताबिक, फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT में सीमित बढ़ोतरी का मकसद जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी को रोकना, बाजार को ज्यादा स्थिर बनाना और लॉन्ग-टर्म रिटेल व संस्थागत निवेशकों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

सरकार को कितना अतिरिक्त राजस्व मिलेगा?

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर बढ़े हुए STT से सरकार को सालाना करीब ₹15,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।

2026 में निवेशकों की खरीद-बिक्री का हाल

2026 में अब तक घरेलू संस्थागत निवेशक करीब ₹68,538 करोड़ के शेयर खरीद चुके हैं। इनमें म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियां शामिल हैं। इसके मुकाबले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस साल अब तक करीब ₹30,000 करोड़ की बिकवाली की है।

गौर करने वाली बात यह है कि 2025 में विदेशी निवेशक पहले ही करीब ₹1.7 लाख करोड़ के शेयर बेच चुके थे। ऐसे में हालिया बिकवाली के बावजूद, लंबी अवधि में DII अब भी बाजार के लिए एक मजबूत सहारा बने हुए हैं।

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