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मार्च से इन 18 शेयरों में F&O ट्रेडिंग होगी महंगी, NSE ने 15% अतिरिक्त मार्जिन लगाया, देखें लिस्ट

Published on 19/02/2026 03:17 PM

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) यानी एनएसई ने डेरिवेटिव मार्केट में जोखिम कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक्सचेंज ने घोषणा की है कि कुछ चुनिंदा शेयरों पर मार्च सीरीज से 15% अतिरिक्त मार्जिन लगाया जाएगा। यह फैसला उन शेयरों पर लागू होगा, जहां मार्केट-वाइड पोजिशन लिमिट (MWPL) में टॉप 10 क्लाइंट्स की हिस्सेदारी 20% से ज्यादा है। एक्सचेंज का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य डेरिवेटिव पोजिशन में कंसंट्रेशन रिस्क को कम करना है।

किन शेयरों पर लगेगा अतिरिक्त मार्जिन?

मार्च सीरीज के लिए एनएसई ने 18 शेयरों की सूची जारी की है, जिन पर यह अतिरिक्त 15% मार्जिन लागू होगा। इनमें आदित्य बिड़ला कैपिटल, अरबिंदो फार्मा, बंधन बैंक, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स, ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स, वोडाफोन आइडिया, JSW एनर्जी, LIC हाउसिंग फाइनेंस, NBCC इंडिया, NMDC, पतंजलि फूड्स, RBL बैंक, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, सम्मान कैपिटल, DLF, मणप्पुरम फाइनेंस और इंडस टावर्स शामिल हैं।

इन शेयरों में फ्यूचर्स और ऑप्शंस पोजिशन लेने वाले ट्रेडर्स को अब ज्यादा मार्जिन जमा करना होगा।

ASM वाले शेयरों पर भी लागू

एनएसई ने साफ किया है कि जिन शेयरों पर पहले से अतिरिक्त निगरानी उपाय यानी ASM फ्रेमवर्क लागू है, उन पर भी यह 15% अतिरिक्त मार्जिन जारी रहेगा।

शेयरों की पहचान तीन महीने के रोलिंग डेटा के आधार पर की जाएगी। हर महीने इस सूची की समीक्षा होगी। यानी अगर किसी शेयर में कंसंट्रेशन कम होती है तो उसे सूची से बाहर भी किया जा सकता है।

ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?

उदाहरण के तौर पर आदित्य बिड़ला कैपिटल में मौजूदा एक्सपोजर मार्जिन करीब 2.01 लाख रुपये है। अतिरिक्त 15% मार्जिन लागू होने के बाद ट्रेडर्स को लगभग 30,203 रुपये अतिरिक्त लाने होंगे। इससे कुल एक्सपोजर मार्जिन करीब 2.31 लाख रुपये हो जाएगा।

इस फैसले का सीधा असर उन निवेशकों और ट्रेडर्स पर पड़ेगा, जो इन शेयरों में बड़ी डेरिवेटिव पोजिशन लेते हैं। मार्जिन बढ़ने से लीवरेज कम होगा और सट्टेबाजी पर अंकुश लगेगा।

क्यों उठाया गया यह कदम?

हाल के समय में कुछ शेयरों में चुनिंदा बड़े खिलाड़ियों की भारी पोजिशन देखने को मिली है। इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। NSE का मानना है कि अतिरिक्त मार्जिन से जोखिम नियंत्रित रहेगा और बाजार ज्यादा संतुलित बनेगा। मार्च सीरीज में यह नया नियम लागू होने के बाद संबंधित शेयरों में ट्रेडिंग वॉल्यूम और पोजिशनिंग पैटर्न पर नजर रहेगी।

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