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पूरे F&O में नहीं है दिक्कत, F&O बैन के नियमों पर किया जाएगा विचार : SEBI चीफ तुहिन कांत पांडे

Published on 02/03/2026 03:36 PM

तुहिन कांता पांडे ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन के तौर पर एक साल पूरा कर लिया है। मनीकंट्रोल की सीनियर कंसल्टिंग एडिटर, एन महालक्ष्मी ने उनके साथ बैठकर यह समझने की कोशिश कि पिछला साल कैसा रहा, SEBI अभी किन खास पॉलिसी मुद्दों पर विचार कर रहा है, और उनके दूसरे साल में रेगुलेटर का फोकस कहां पर होगा। यहां हम आपके लिए इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का संपादित अंश दे रहे हैं।

अकेले ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में लगभग 58 सुधार किए गए

पिछला साल बहुत मुश्किल साल रहा है। लेकिन 2025 में प्राइमरी मार्केट काफी अच्छा रहा। हम IPO में नंबर वन रहे और वैल्यू, डेट और इक्विटी इश्यू के मामले में नंबर तीन पर रहै। खराब ग्लोबल स्थतियों के बावजूद हमने तालमेल बनाए रखा है। SEBI कई सुधार किए हैं और सच में कहें को 2025 सुधारों का साल रहा।, जिसका मकसद सबसे अच्छा रेगुलेशन लाना था। ट्रांसपेरेंसी, भरोसा, टीमवर्क और टेक्नोलॉजी इन सभी सिद्धांतों को SEBI अधिकारियों ने मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ मिलकर अच्छी नियम लागू किए। अकेले ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में लगभग 58 सुधार किए गए हैं।

तुहिन कांता पांडे ने टाइगर ग्लोबल टैक्स केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर उत्पन्न चिंताओं पर कहा कि ऐसे बड़े फैसलों से इन्वेस्टर में स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चिंताएं अक्सर दूसरे ट्रांज़ैक्शन परए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के असर से जुड़ी होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि विदेशी इन्वेस्टर्स से जुड़ना और बातचीत और पॉलिसी में स्पष्टता के ज़रिए चिंताओं को दूर करना सरकार का काम है। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले ही काफी सुलझ चुका था, और CBDT ने इस पर अपनी बात रखी थी। इसके बाद, कई करारो में बदलाव किए गए हैं।

पब्लिक इश्यू को सिर्फ लिस्टिंग-डे गेन से जज करने से बचें

पांडे ने कहा कि IPO से होने वाली कमाई पर नज़र रखने का सिस्टम पहले से ही मज़बूत है। आईपीओ के वैल्यूएशन का आधार और बिज़नेस की जानकारी इश्यू डॉक्यूमेंट्स में अच्छी तरह से बतानी होती है। LODR रिव्यू में आगे देखा जा सकता है कि कोई दिक्कत है या नहीं। इन्वेस्टर्स को पब्लिक इश्यू को सिर्फ लिस्टिंग-डे गेन से जज करने से बचना चाहिए। SEBI के चेयरमैन ने “लिस्टिंग पॉप्स” पर बहुत ज़्यादा फोकस करने के खिलाफ चेतावनी दी, और कहा कि इक्विटी इन्वेस्टिंग को लंबे समय के लिए इवैल्यूएट किया जाना चाहिए।

पांडे ने कहा कि भारत का IPO इकोसिस्टम मज़बूत डिस्क्लोज़र पर आधारित है, जिससे इन्वेस्टर खुद से वैल्यूएशन और बिज़नेस मॉडल का अंदाज़ा लगा सकते हैं। उन्होंने बताया कि DRHPs और RHPs जैसे ऑफ़र डॉक्यूमेंट्स में डिटेल्ड तुलना वाला डेटा मौजूद है, जिससे इंस्टीट्यूशनल और एंकर इन्वेस्टर सोच-समझकर फ़ैसले ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्राइसिंग में मार्केट-बेस्ड डिसिप्लिन मिलता है। IPO क्वालिटी के सवाल पर, पांडे ने कहा, “हमें सच में एक ही चीज़ को स्टीरियोटाइप नहीं करना चाहिए या एक ही चीज़ पर टिके नहीं रहना चाहिए। मुझे लगता है कि हम एक बहुत मज़बूत मार्केट हैं जो डिस्क्लोज़र से भरा है”।

उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर के पास यह चॉइस होती है कि वे IPO में पैसा लगाएं या नहीं। एंकर इन्वेस्टर के पास भी अपनी चॉइस होती है। जब वे बुक-बिल्डिंग प्रोसेस में हिस्सा लेते हैं, और वे कंपनियों से न सिर्फ़ वैल्यूएशन बल्कि बिज़नेस मॉडल पर भी एक्टिवली सवाल करते हैं। आखिर में मार्केट अपनी काम करता है। कई बार ऐसे हालात बनते हैं जब मार्केट ऊपर-नीचे होता है। इस पर किसी का नियंत्रण नहीं है।

पांडे ने कहा है कि रेगुलेटर डेरिवेटिव्स मार्केट, खासकर शॉर्ट-डेटेड इंडेक्स ऑप्शंस में होने वाली भारी सट्टेबाजी को रोकने के लिए पहले उठाए गए कदमों के असर का बारीकी से आकलन कर रहा है और अगर जरूरत होगी को सट्टेबाजी को रोकने के लिए आगे भी दखल दिया जा सकता है। रेगुलेटरी चिंताएं डेरिवेटिव्स सेगमेंट के एक खास हिस्से को लेकर ही हैं। मुख्य रूप से शॉर्ट-डेटेड इंडेक्स ऑप्शंस, खासकर वीकली एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर चिंता है। बाकी डेरिवेटिव्स मार्केट को लेकर उतनी चिंता नहीं है।

उन्होंने इस बातचीत में अनरजिस्टर्ड फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसरओर भी इशारा किया जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हाई-रिस्क ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी को बढ़ावा देते हैं और अक्सर डेरिवेटिव्स को तेजी से पैसे कमाने का रास्ता बताते है । पांडे ने कहा कि डेरिवेटिव्स मार्केट मुश्किल होता है, लेकिन फिन-फ्लुएंसर इससे आसानी से पैसे कमाने के सपने बेचते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए SEBI ने बिना सही रजिस्ट्रेशन के सलाह देने वाले लोगों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है।

पांडे ने कहा कि पिछले साल, SEBI ने सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए कई रेगुलेटरी कदम उठाए। अक्टूबर 2024 में उपाय शुरू किए गए, इसके बाद मई 2025 में छह और कदम उठाए गए, जिनमें से आखिरी दिसंबर में लागू हुआ। ऐसे में रेगुलेटर अब इनके असर के आकलन के मोड में है।

क्या भारत को डेरिवेटिव्स में हिस्सा लेने के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया लागू करने चाहिए? इसके जवाब में पांडे ने कहा कि इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। यह इस बात पर निर्भर करेगा अब तक लिए गए फैसलों का क्या असर पड़ा है। SEBI किसी भी तरह का रेगुलेशन लाने की जल्दी में नहीं है, लेकिन यह एक कैलिब्रेटेड अप्रोच के साथ होगा।

 

 

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