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SEBI ने प्रॉप ट्रेडिंग अकाउंट के दुरूपयोग की जांच के दिए आदेश, मनीकंट्रोल ने किया था मामले का खुलासा

Published on 13/11/2025 07:25 PM

सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों को प्रॉप-ट्रेडिंग अकाउंट्स के दुरूपयोग मामले की जांच करने को कहा है। पिछले हफ्ते मनीकंट्रोल ने इस मामले का खुलासा किया था। मनीकंट्रोल ने बताया था कि कुछ ब्रोकिंग फर्में कई शहरों में इंडिविजुअल ट्रेडर्स को अपने ट्रेडिंग अकाउंट्स का इस्तेमाल करने की सुविधा दे रही थी। इसके एवज में वे प्रॉफिट में हिस्सेदारी लेती थी, जो सेबी के नियमों का उल्लंघन है।

एक्सचेंज मामले की जांच कर सौपेंगे रिपोर्ट

SEBI के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर जांच के आदेश जारी होने की की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, "सेबी ने एक्सचेंजों को इस उलंल्घन की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने को कहा है।" उन्होंने बताया कि इन आरोपों को गंभीरता से लिया गया है, क्योंकि ऐसा लगता है कि इसमें नियमों का उल्लंघन हुआ है।

प्रॉप-अकाउंट के इस्तेमाल के नियम होंगे सख्त

सेबी के स्टॉक एक्सचेंजों के साथ विचार करने के बाद नियमों में जल्द बदलाव करने की भी संभावना है। इससे प्रॉप-अकाउंट के दुरूपयोग के मामलों पर रोक लगेगी। इसमें ऐसे ट्रेडिंग टर्मिनल्स के मीडिया एक्सेस कंट्रोल (MAC) और आईटी एड्रेस की मैपिंग को अनिवार्य बनाया जा सकता है। इंस्पेक्शन या इनवेस्टिगेशंस के दौरान सेबी के अधिकारी इस बात का पता लगा सकेंगे कि ट्रेड के लिए किस टर्मिनल का इस्तेमाल किया गया। इससे ट्रेड करने वाले व्यक्ति का पता लगाना आसान हो जाएगा।

कई शहरों में प्रॉप अकाउंट के एक्सेस दिए गए

मनीकंट्रोल ने बताया था कि प्रॉप ट्रेडिंग स्कैम में सूरत में ट्रेडिंग टर्मिनल्स के एक्सेस दिल्ली-एनसीआर, जोधपुर, कोल्हापुर और रांची में इंडिविजुअल्स ट्रेडर्स को दिए गए। इसी तरह दिल्ली-एनसीआर के एक ब्रोकर के प्रॉप-ट्रेडिंग टर्मिनल का एक्सेस जोधपुर और मुंबई में इंडिविजुअल ट्रेंडर्स को दिए गए। अगर ऐसे टर्मिनल्स के एक्सेस की सख्ती से मॉनिटरिंग की जाती है तो उनके दुरूपयोग को रोका जा सकता है।

प्रॉप अकाउंट की परिभाषा भी बदल सकती है

सेबी ने हाल में इश्यू एक कंसल्टेशन पेपर में प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग की परिभाषा तय करने की बात कही है। अभी 'प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग मेंबर' का मतलब ऐसे स्टॉक ब्रोकर से होता है, जो एक मान्यताप्राप्त एक्सचेंज के डेट सेगमेंट में अपने खुद के अकाउंट या सेक्टर रेगुलेटर की इजाजत के हिसाब से ट्रेड करता है। प्रॉपरायटरी ट्रेडिंग मेंबर की अभी जो परिभाषा है, उसके तहत सिर्फ डेट सेगमेंट आता है।

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यह स्कैम करीब 150 करोड़ रुपये का है

मनीकंट्रोल ने इस मामले का खुलासा तीन हिस्सों में किया था। इनमें बताया गया था कि ब्रोकर्स न सिर्फ एक्सचेंज और सेबी के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि मार्केट और इंडिविजुअल ट्रेडर्स के लिए रिस्क भी बढ़ा रहे हैं। शुरुआत में सूरत का प्रॉप-ट्रेडिंग अकाउंट स्कैम 5 करोड़ का लगा था। लेकिन, बाद में इस स्कैम के 150 करोड़ रुपये के होने का पता चला।हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।