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Share Market Rise: शेयर बाजार में इन 4 कारणों से तूफानी तेजी, सेंसेक्स 950 अंक उछला, निफ्टी भी 25000 के पार

Published on 02/02/2026 03:16 PM

Share Market Rise: भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार 2 फरवरी को शुरुआती गिरावट के बाद तेज रिकवरी देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 950 अंकों तक उछल गया। वहीं निफ्टी बढ़कर एक बार फिर 25,000 के पार पहुंच गया। रविवार 1 फरवरी को बजट के बाद दिखी तेज गिरावट के बाद निवेशक आज बाजार में निचले स्तर पर वैल्यू बाइंग करते हुए दिखे। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, बजट के लॉन्ग-टर्म संकेत और रुपये की मजबूती से भी बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ।

दोपहर 3.05 बजे के करीब, बीएसई सेंसेक्स शुरुआती गिरावट से उबरकर 948.67 अंक या 1.18% की तेजी के साथ 81,671.61 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी इंडेक्स 258.75 अंक या 1.04 फीसदी की उछाल के साथ 25,084.20 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

शेयर बाजार में आज की इस तेजी के पीछे 4 बड़े कारण रहे-

1. वैल्यू बाइंग से लौटी खरीदारी

शेयर बाजार में तेजी का सबसे बड़ा कारण पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद आई वैल्यू बाइंग रही। 1 फरवरी को बजट के दिन दौरान शेयर बाजार ने छह साल में सबसे बड़ी गिरावट (प्रतिशत के मामले में) दर्ज की थी। बजट के प्रावधानों को लेकर शुरुआती घबराहट के बाद निवेशकों को कई अच्छे शेयर आकर्षक कीमतों पर मिलते दिखे। इससे चुनिंदा स्तरों पर खरीदारी तेज हो गई और बाजार ने रिकवरी की राह पकड़ी।

2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट

दूसरा बड़ा सहारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई जोरदार गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड 4.14 प्रतिशत टूटकर 66.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े तेल खरीदार देशों के लिए राहत मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव कम होता है और चालू खाते व व्यापार संतुलन में सुधार की उम्मीद बनती है। इसी उम्मीद से शेयर बाजार को सपोर्ट मिला।

3. बजट के लॉन्ग-टर्म संकेतों से बढ़ा भरोसा

बजट 2026-27 को लेकर आए शुरुआती नेगेटिव फीडबैक के बाद निवेशकों ने अब इसके लॉन्ग-टर्म पहलुओं पर ध्यान देना शुरू किया है। बजट में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, ग्लोबल डेटा सेंटर के लिए लॉन्ग-टर्म टैक्स इंसेटिव, एग्रीकल्चर और पर्यटन सेक्टर के लिए समर्थन जैसे कदमों ने बाजार के सेंटीमेंट को मजबूत किया। 53.5 लाख करोड़ रुपये के बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च बनाए रखने के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन के संकेत भी दिए गए, जिसे निवेशकों ने पॉजिटिव रूप में लिया।

4. रुपये की मजबूती से मिला अतिरिक्त सहारा

बाजार की रिकवरी में रुपये की मजबूती ने भी भूमिका निभाई। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 37 पैसे मजबूत होकर 91.56 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को सहारा मिला। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि बजट ने रुपये को राहत भले न दी हो, लेकिन भरोसा जरूर दिया है। हालांकि, सरकार की उधारी योजना निवेशकों की चिंता का विषय बनी रह सकती है। सरकार ने बजट में अगले वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की संभावना जताई है।

टेक्निकल एक्सपर्ट्स की क्या है राय?

HDFC सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील के मुताबिक, निफ्टी 24,900 से 25,450 के दायरे से नीचे टूट गया है। निफ्टी एक बार फिर 200-दिनों के SMA और EMA से नीचे आ गया है, जिससे गिरावट का रुझान फिर से शुरू होने के संकेत मिलते हैं। आगे निफ्टी को 24,571 और 24,337 के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊपर की ओर 25,000 से 25,150 का स्तर फिलहाल रेजिस्टेंस बन सकता है।

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